धार्मिक

योगिनी एकादशी व्रत -समस्त पाप दूर कर अंत में स्वर्ग की होती है प्राप्ति

हिन्दू धर्म उपासनाओं का धर्म है| हिन्दू धर्म ग्रंथों में ऐसे अनेकों व्रतों और अनुष्ठानों का वर्णन है जिन्हें अगर व्यक्ति शुद्ध मन और पूर्ण विधि-विधान से करे तो उसके समस्त पाप नष्ट हो जाएँगे तथा उसे मनोवांछित फल की प्राप्ति होगी| ऐसे ही व्रतों में एक व्रत है “योगिनी एकादशी” का व्रत जो 29 जून को है | योगिनी एकादशी व्रत मनोकामनाओं को पूर्ण करने वाला है| योगिनी एकादशी व्रत की उपासना आषाढ़ मास की कृष्ण पक्ष को की जाती है| इस व्रत की कथा भगवान शिव के भक्त कूबेर से जुडी हुई है| यह तीनों लोकों में प्रसिद्ध है। आइये जानते हैं योगिनी एकादशी के महत्व, व्रत विधि और इसकी कथा के बारे में।

क्या है प्रसिद्ध कथा

अलकापुरी नाम की एक नगरी में कूबेर नाम का एक राजा रहा करता था। ईश्वर की कृपा से धन धान्य की कोई कमी नहीं थी क्योंकि कूबेर शिव भक्त था और प्रतिदिन शिव की पूजा-अर्चना किया करता था|  हेमा नाम का एक माली था जो भगवान शिव की पूजा के लिए फूल लाया करता था। हेमा की विशालाक्षी नाम की अर्धांगिनी थी। एक दिन की बात है हेमा मानसरोवर से पूजा के लिए फूल तो ले आया लेकिन कामासक्त होने के कारण वह अपनी स्त्री से हंसी-मजाक व विलास में लीन हो गया।

राजा दोपहर तक उसकी राह देखता रहे| जब वह नहीं आया तो राजा ने अपने सेवकों से कहा की जाओ और हेमा माली का पता लगाकर आओ कि वह कहां रह गया और अभी तक फूल लेकर क्यों नहीं आया| सेवकों ने उत्तर दिया कि, महाराज हेमा माली पापी और कामी है,  अपनी स्त्री के साथ कहीं हास्य-विनोद में व्यस्त होगा। इतना सुनते ही कूबेर गुस्से से लाल हो गए और हेमा माली को बुलावा भेजा।

हेमा माली ने जब सेवकों से ये बात सुनी कि राजा उसपे क्रोधित हो गया है तो वह भय से काँपता हुआ राजा के समक्ष पेश हुआ। राजा कूबेर ने क्रोधित स्वर में हेमा माली को श्राप देते हुए कहा कि- ‘अरे पापी, नीच, कामी तूने मेरे आराध्य भगवान भोलेनाथ का निरादर किया है,  इस‍लिए मैं तुझे श्राप देता हूँ कि तू स्त्री का वियोग सहेगा और मृत्युलोक में जाकर कोढ़ी होगा।’

कूबेर के श्राप के कारण स्वर्ग से हेमा माली का नाश हो गया और वह उसी क्षण पृथ्वी पर आ गिरा। पृथ्वी पर गिरते ही उसे कोढ़ हो गया। उसकी स्त्री भी उसी समय अदृश्य हो गई। श्राप के कारण माली जंगल में भूखा प्यासा भटकता रहा। दिन-रात की कोई सुध नही थी, लेकिन शिवजी की पूजा के कारण  पिछले जन्म की कुछ बाते उसे स्मरण थी। जंगलो में भटकते-भटकते माली मार्कण्डेय ऋषि के आश्रम पहुँचा,  जो भगवान ब्रह्मा से भी अधिक वृद्ध थे, जिनका आश्रम ब्रह्मा की सभा की तरह दिखाई दे रहा था, जैसे ही हेमा माली ने वह दृश्य देखा, मार्कण्डेय ऋषि के चरणों में जाकर गिर पड़ा|

माली को देख मार्कण्डेय ऋषि ने पूछा- ऐसा कौन-सा पाप किया है तुमने, जिसके प्रभाव से तुम्हारी यह दुर्दशा हुई है। हेम माली ने अपनी दुर्दशा का सारा दुखड़ा ऋषि को सुना दिया, सुनते ही ऋषि बोले- निश्चित ही तुमने जो भी कहा सत्य ही कहा होगा, इसलिए तुझे इस दशा से मुक्ति दिलाने के लिए मैं तुझे एक व्रत बताता हूँ। यदि तु ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की योगिनी नामक एकादशी का साफ हृदय, विधिपूर्वक व्रत रखेगा तो तेरे सभी पाप नष्ट हो जाएँगे। इतना सुनते ही हेम माली प्रसन्न हो गया और मुनि को साष्टांग प्रणाम करने लगा। मुनि ने उन्हें उठाया।

हेम माली ने मुनि के कहे अनुसार विधिपूर्वक योगिनी एकादशी का व्रत रखा जो सफल रहा और इस व्रत के फलस्वरूप हेमा माली अपने पुराने स्वरूप में वापस आ गया और अपनी पत्नी के साथ सुखमय जीवन व्यतित करने लगा|

व्रत की विधि : 

इस व्रत में भगवान विष्णु की आराधना की जाती है| पुराणों के अनुसार एकादशी का व्रत एक दिन पहले सूर्यास्त के बाद से ही शुरू हो जाता है रात को सोते समय भगवान का ध्यान करते हुए सोना चाहिए। व्रत रखने वालो को अपने मन में किसी भी प्रकार की द्वेष भावना या क्रोध नहीं रखना चाहिए|

प्रातः जल्दी उठें, स्नान करे, निर्मल वस्त्र धारण करें| भगवान विष्णु की प्रतिमा के सामने घी का दीपक जलाएं,  पूजा सामग्री में तुलसी, ऋतु फल, फूल व तिल का प्रयोग जरूर करें।

इस व्रत में अन्न नहीं खाना चाहिए, शाम की पूजा के बाद व्रती फल खा सकते है| ऐसा कहा जाता है कि एकादशी व्रत जो नहीं भी कर रहे हैं उन्हें उस चावल का सेवन नहीं करना चाहिए| एकादशी के दिन चावल सर्वथा वर्जित बताया गया है| एकादशी व्रत के अगले दिन यानी द्वादशी के दिन ब्राह्मण को भोजन करवाने और दक्षिणा देने के बाद व्रत की पूर्णाहुति होती है। उसके बाद व्रती भोजन करते हैं|

इस प्रकार सम्पूर्ण विधि-विधान और निष्ठा से किये जाने पर योगिनी एकादशी समस्त मनोकामनाओं को पूर्ण करती है|

योगिनी एकादशी व्रत की तारिख और समय

योगिनी एकादशी तारिख – (29 जून 2019)

व्रत के बाद पहला भोजन का समय  – 05:30 से 06:15 बजे तक (30 जून 2019)

पारण के दिन द्वादशी तिथि समाप्त – 06:11 बजे (30 जून 2019)

एकादशी तिथि आरंभ – 06:36 बजे (28 जून 2019)

एकादशी तिथि समाप्त – 06:45 बजे (29 जून 2019)

 

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