मनोरंजन

विश्व संगीत दिवस

मेरा संगीत उस व्यवस्था के खिलाफ है जो हमे बस जीना और मरना सिखाती है। बॉब मार्ले के द्धारा कहे गए ये शब्द आज भी चरितार्थ हैं। संगीत की दुनिया में कोई ऐसा शख्स नही होगा जो बॉब मार्ले को नही जानता होगा। कम उम्र में ही संगीत की दुनिया में वो मुकाम हासिल किया जहां तक पहुंचना हर कलाकार के लिए सपना होता है। आज भी बॉब मार्ले के  गानों को खूब सुना और गाया जाता है। अगर इसमें अमरीकी पॉप गायक माइकल जैकसन का नाम भी जोड़ दिया जाए तो कोई दो राय नही होगी। अपने गानों की वजह से वह कई बार अपना नाम गिनीज बुक में भी दर्ज करवा चुके हैं। इस संदर्भ में अगर भारत की बात की जाए तो इसका इतिहास काफी पुराना है।

संगीत का इतिहास

जब से इंसान ने बोलना सीखा तब से ही संगीत उसकी दुनिया में रच बस गया है। हर भाषा और संस्कृति में संगीत का  अपना इतिहास है। संगीत हमारी प्राचीनतम धरोहर में से एक है और इसकी परम्परा आज से कल से नही बल्कि सदियों से चली आ रही है। पुराणों में हमारे जितने भी देवी-देवताओं का जिक्र मिलता है, सभी किसी न किसी वाद्य यंत्र से संबद्ध माना गया है। माता सरस्वती और महर्षि नारद की वीणा, भगवान विष्णु का शंख, शिव जी का डमरू और श्री कृष्ण की मुरली आज भी उनकी प्रतीक मानी जाती है। संगीत के बिना प्रकृति अधूरी सी लगती है, जैसे सुबह-सुबह पक्षियों की

चहचहाट, झरनों की धुन, समुद्र के किनारों पर उछल—कूद करती लहरों की धुन,चिड़ियों का चहकना और पेड़ों के पत्ते का लहराना, बादलों की गर्जना आदि। अगर इन सभी को एक व्यवस्थित क्रम में पिरोया जाए तो यह संगीत का आकार ले लेती है। संगीत एक ऐसी चीज है, जो हमारी खुशी और गम दोनों में हमारा सबसे अच्छा साथी है। संगीत वही है जिसमें लय हो, इस तर्ज पर कविताएं भी संगीत से कम नहीं होतीं। उनमें लय है, शब्दों के आरोह-अवरोह हैं और गायन भी है। संगीत के कई बेहतरीन यंत्र जैसे बीन, मृदंग, ढोल, तबला, शहनाई, सरोद, डमरू, घंटी, ताल, चांड, घंटा, पुंगी, पखावज, संतूर आदि का आविष्कार भारत में ही हुआ। इसके अलावा आदिवासी जातियों के भी अपने कई संगीत यंत्र हैं।

विश्व संगीत का इतिहास

वैसे तो हर दिन संगीत के नाम ही होता है पर संगीत से जुड़े कलाकरों को सम्मान देने के लिए हर साल 21 जून को विश्व संगीत दिवस मनाया जाता है। विश्व संगीत दिवस को ‘फेटे डी लॉ म्यूजिक’ के नाम से भी जाना जाता है। इसका अर्थ म्यूजिक फेस्टिवल है। इसकी शुरूआत फ्रांस से हुई जहां पहली बार 1982 में विश्व संगीत दिवस मनाया गया। फ्रांस में इस दिन सभी लोग अपने—अपने वाद्य यंत्रों के साथ सड़कों पर आ जाते हैं और अपने—अपने संगीत की कला का प्रदर्शन करते हैं। इस दिन फ्रांस में एक अलग ही माहौल देखने को मिलता है। शहर के कोनों—कोनों से सिर्फ संगीत ही सुनाई देता है।

विश्व संगीत दिवस पर हर फ्रांसीसी लोग सड़क पर उतर आते हैं, कुछ-न-कुछ गाने, कोई-न-कोई वाद्य बजाने, थिरकने या सिर्फ सुनने के लिए बाहर निकल पड़ते हैं। लोगों में संगीत के प्रति जुनून इस कदर होता है कि सड़कों पर पैर रखने की जगह नहीं होती, तो लोग अपने-अपने घरों की छतों पर गाना शुरू कर देते हैं। विश्व संगीत दिवस अब फ्रांस में ही नही बल्कि 120 से ज्यादा देशों में मनाया जाता है। यह दिवस को मनाने में अर्जेंटीना, ब्रिटेन, जर्मनी, चीन, जैसे बड़े देश शामिल हैं,  इसके अलावा भारत में भी अब यह मनाया जाने लगा है।

संगीत का प्रभाव उपचार में

आज के समय में संगीत ना सिर्फ सुनने के काम ही नही बल्कि उपचार में भी संगीत का उपयोग लिया जाने लगा है। हाल ही में एक शोध में बताया गया कि एक अच्छा संगीत आपके तनाव को दूर भगाता है। अगर आपको अपना मूड ठीक करना है तो संगीत एक बढ़िया माध्यम हो सकता है। संगीत एक ही लींग थेरेपी  का काम करता है। संगीत के सात सुरों में छिपे राग मन को शांति देने के साथ ही रोगों को भी दूर करने में सहायक होते हैं। संगीतज्ञ पुरुषोत्तम शर्मा शास्त्रीय संगीत से तनाव व

इसी से जुड़े अन्य रोग दूर कर रहे हैं। उनका कहना है कि वे अपने रोगियों को कोई दवा या व्यायाम नहीं कराते। केवल एकाग्र मन से राग सुनने की नसीहत देते हैं, जिससे रोगियों में आत्मविश्वास भी बढ़ता है।

तुर्की-फ़ारसी मनोवैज्ञानिक तथा संगीत सैद्धांतिक अल-फ़राबी (872–950) ने, जिन्हें यूरोप में एल्फराबियस के नाम से जाना जाता है, अपने निबंध मीनिंग ऑफ़ द इंटेलेक्ट में संगीत चिकित्सा का वर्णन किया है, जहां उन्होंनें आत्मा पर संगीत के उपचारात्मक प्रभाव की चर्चा की है।

भारतीय ग्रन्थों जैसे-

  1. ऋग्‍वेद में ‘‘गाथपति नामक चिकित्‍सक का उल्‍लेख है जिसका तात्‍पर्य संगीत चिकित्‍सक से है।
  2. सामवेद में, जो भारतीय संगीत का वेद माना जाता है, रोग-निवारण के लिये राग-गायन का विधान मिलता है।
  3. अथर्ववेद में ऋक, यजुष और साम के ऐसे मंत्र थे, जो जीवन से व्‍यवहार से और स्‍वास्‍थ्‍य से सम्‍बन्‍धित थे।

 

संगीत एक ऐसा माध्यम है जो पूरी दुनिया को जोड़ने का काम करता है। आज भी अगर किन्हीं दो देशों के बीच तनाव की स्थिति भले ही क्यों न हो पर संगीत इसे हमेशा जोड़ने का काम करता है। फिर चाहे शादी में बजने वाला भारी—भरकम संगीत हो या फिर किसी के जन्मदिन पर बजने वाला संगीत हो। संगीत सिर्फ आपको जोड़ने का काम ही करता है। इस दिन को एक खास दिन के रूप में मनाया जाना चाहिए। अपने पसंदीदा गायक को सुने और हर दिन एक नई शुरूआत करें।

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