धार्मिक

प्रवेशद्वार की दिशा 

घर के प्रवेशद्वार की दिशा दक्षिण अथवा पश्चिम दिशा की तरफ नहीं होना चाहिए। पूर्व और उत्तर दिशा में मुख्य द्वार होना वास्तु की दृष्टि से सबसे उत्तम होता है। अगर किसी भवन में दो बाहरी दरवाज़े हों तब इस बात का अवश्य ध्यान रखें कि दोनों द्वार एक-दूसरे के सामने नहीं हो, कहते हैं इससे धन जैसे आता है वैसे ही चला भी जाता है।

कहां स्थित हो मुख्यद्वार- 

मुख्यद्वार कभी भी बीच में नहीं होना चाहिए। भारतीय वास्तुशास्त्र के अनुसार जिस दीवार के साथ मुख्यद्वार बनवानी हो उस दीवार को नौ भागों में बांटें। इसके बाद भवन में प्रवेश की दिशा से बायीं ओर पांच भाग और दायीं ओर से तीन भाग छोड़कर प्रवेशद्वार बनवाएं। इससे प्रवेश बड़ा होगा और निकास छोटा। माना जाता है कि ऐसा होने से आय अधिक होता है और व्यय कम।

वास्तु-वेध’ से बचें-

मुख्यद्वार के सामने मंदिर, वृक्ष, कुआँ अथवा स्तंभ नहीं होना चाहिए। इसे ‘वास्तु वेध’ कहा जाता है यानी लक्ष्मी का प्रवेश बाधित होता है। इससे बचने का उपाय ज्यादा कठिन नहीं है। वास्तु विज्ञान के अनुसार बस आपको इस बात का ख्याल रखना है कि भवन की ऊंचाई से दोगुनी दूरी पर उपरोक्त चीजें न हों। उसके आगे होने पर भी वास्तु-वेध नहीं लगता है।

  1. घर के मुख्य द्वार से ही सकारात्मक और नकारात्मक ऊर्जाओं के प्रवेश का आदान-प्रदान शुरू होता है। इसलिए घर के द्वार पर चांदी के बने स्वास्तिक को बनाएं जिससे घर में सकारात्मकता आएगी।
  2. धन के देवता कुबेर का घर उत्तर दिशा में है तो इस दिशा को सशक्त बनाएं।
  3. घर में पेड़-पौधे लगाने से ही सकारात्मक ऊर्जा को स्थान मिलता है। यह पूर्व दिशा के दोषों को हटाकर संतुलन बनाने का कार्य करते हैं।
  4. घर के उत्तर, पूर्व से कूडा-करकट को फेंककर, पुराने कपड़ों और अन्य वस्तुओं को हटा दें इससे घर में क्लेश होता है।
  5. घर में ऐसे चित्र जो वीरान घर, लड़ाई-झगड़े, पतझड़ आदि नकारात्मक बातों को बढ़ाते हैं उनके स्थान पर वहां मन को उत्साह, आनंद, उमंग, शांति व तरोताजगा करने वाले चित्र लगाएं।
  6. जल तत्व संबंधी चित्रों को सोने के कमरे में न लगाएं।
  7. दक्षिण-पश्चिम में शीशा नहीं लगाना चाहिए। इससे बनते काम अंतिम दौर में पूर्ण नहीं होते।
  8. घर की दक्षिण दिशा में जलतत्व या नीला रंग नहीं होना चाहिए। यदि ऐसा करना अति आवश्यक हो तो हरे और लाल रंग का मिश्रण या केवल लाल रंग का ही प्रयोग करना चाहिए।
  9. जमीन खरीदते समय उसकी निकटवर्ती सड़कें और ढलान का खास ध्यान रखना जरूरी है। वे प्लॉट न लें जिस पर दक्षिण-पश्चिम से सड़क आ रही हो। दक्षिण दिशा को सड़क वाले प्लॉट को नहीं खरीदना चाहिए। दक्षिण-पश्चिम दिशा को कटता प्लॉट भी नहीं खरीदना चाहिए।
  10. दक्षिण दिशा के रसोई घर में सफेद रंग का रोगन वास्तु दोष को दूर कर देता है।
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