अंतर्राष्ट्रीय

पीएम नरेंद्र मोदी की किर्गिस्तान यात्रा

भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 13 जून को किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक पहुंचे| पीएम नरेंद्र मोदी ने  किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में 13-14 जून को आयोजित शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शिखर सम्मेलन में हिस्सा लिया। इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य एससीओ के सदस्य देशों के साथ भारत के संबंधों को मजबूत करना है। साथ ही यह संगठन पूरे क्षेत्र की समृद्धि के लिए जलवायु परिवर्तन, शिक्षा, कृषि, ऊर्जा और विकास की समस्याओं पर ध्यान केन्द्रित करता है जो कि भारत के लिए भी महत्वपूर्ण है। बता दें कि शंघाई सहयोग संगठन चीन के नेतृत्व वाला आठ सदस्यीय आर्थिक और सुरक्षा समूह है जिसमें भारत और पाकिस्तान को साल 2017 में ही शामिल किया गया था।

एससीओ में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भाषण के मुख्य बिंदु

किर्गिस्तान में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में अनेक महत्वपूर्ण मुद्दों पर अपनी बात रखी| जिसमे आर्थिक सहयोग, आतंकवाद का सफाया जैसे मुद्दे महत्वपूर्ण थे | प्रधानमंत्री मोदी के भाषण के मुख्य अंश :-

  • अपने भाषण नरेंद्र मोदी ने आर्थिक सहयोग को बढ़ाने के साथ आतंकवाद के मुद्दे को खासतौर पर उठाया और आंतकवाद को सबसे बड़ी समस्या बताते हुए इससे नपटने के लिए एससीओ देशों को साथ आने को कहा। साथ ही उन्होंने श्रीलंका में ईस्टर के दिन हुए आतंकी हमलों में निशाना बनाए गए स्थानों का जिक्र करते हुए कहा कि आतंकवाद की बुराई से लड़ने के लिए राष्ट्रों को इसके खिलाफ एकजुट होने की खातिर अपने संकीर्ण दायरे से बाहर निकलना होगा।
  • पीएम नरेंद्र मोदी ने एससीओ सम्मेलन में बेहद ही खास अंदाज़ में HEALTH नाम का मंत्र दिया। उन्होंने HEALTH शब्द के सभी अक्षरों का अलग-अलग मतलब भी बताया। एच का मतलब हेल्थ कोऑपरेशन (स्वास्थ्य क्षेत्र में सहयोग), ई का मतलब इकॉनामिक कोऑपरेशन (आर्थिक सहयोग), ए का मतलब ऑलटरनेट एनर्जी (वैकल्पिक ऊर्जा), एल का मतलब लिटरेचर एंड कल्चर (साहित्य तथा संस्कृति), टी से टेररिज़्म फ्री सोसायटी (आतंकवाद मुक्त समाज), एच से ह्यूमेनिटेरियन अप्रोच (मानवतावादी रवैया)|
  • नरेंद्र मोदी ने एससीओ सम्मेलन में जलवायु परिवर्तन के मुद्दे को उठाते हुए कहा कि ऊर्जा के क्षेत्र में वैकल्पिक  स्रोतों को विकसित करने में भारत अपना अनुभव एससीओ देशों के साथ साझा करने के लिए तैयार है।
  • पीएम नरेंद्र मोदी ने अपने भाषण में अफगानिस्‍तान का भी जिक्र किया और कहा कि अफगानिस्‍तान में शांति जरूरी है और इसके लिए भारत अफगानिस्‍तान के साथ खड़ा है।
  • पीएम नरेंद्र मोदी ने लिटरेचर और कल्चर के महत्व का जिक्र करते हुए कहा कि यह हमारे समाज को एक सकारात्मतक गतिविधि प्रदान करते हैं। साथ ही उन्होंने कहा कि आधुनिक समय में बेहतर कनेक्टिविटी की जरूरत है ताकि लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने पर जोर दिया जा सके।

पीएम नरेंद्र ने की इन नेताओं से की मुलाकात

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एससीओ सम्मेलन में विभिन्न राष्ट्राध्यक्षों से मुलाकात की। बैठक से पहले उन्होंने किर्गिस्तान के राष्ट्रपति सोरोनबे जीनबेकोव से मुलाकात की। राष्ट्रपति सोरोनबे जीनबेकोव ने एससीओ सम्‍मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का गर्मजोशी से स्‍वागत किया। पीएम मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच भी मुलाकात हुई और इस दौरान पीएम मोदी ने पाकिस्‍तान प्रायोजित आतंकवाद का मुद्दा उठाया तथा चीन को मसूद अजहर को अंतर्राष्ट्रीय आतंकवादी घोषित करने में सहयोग के लिए धन्यवाद दिया|

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बिश्केक में आयोजित एससीओ सम्मेलन में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता की। इस दौरान पीएम मोदी ने पुतिन को अमेठी में राइफल यूनिट लगाने के लिए मदद करने के लिए आभार व्यक्त किया। इसके अलावा नरेंद्र मोदी ने ईरान के राष्ट्रपति हसन रुहानी से भी मुलाकात की।

इमरान ख़ान को नहीं मिला महत्व

किर्गिस्तान में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शिखर सम्मेलन में जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अन्य देशों के राष्ट्राध्यक्षों द्वारा सम्मान और महत्व मिला, वहीं पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान एक बार फिर विवादों में घिर गए| इसमें इमरान खान द्वारा अन्य देशों के राष्ट्राध्यक्षों के सम्मान में खड़ा नहीं होना काफी विवादों में रहा| अपने इस गलत आचरण के कारण इमरान पुरे विश्व में निंदा के पात्र बन गए| इस सम्मेलन में पीएम मोदी और इमरान ख़ान ने केवल एक दूसरे का अभिवादन किया| इमरान ख़ान ने मोदी को चुनाव में मिली जीत की बधाई दी जिसका मोदी ने धन्यवाद से जवाब दिया| इसके अलावा दोनों नेताओं के बीच कोई औपचारिक बैठक नहीं हुई और न ही  किसी मुद्दे पर बातचीत हुई। मालुम हो की भारत पुलवामा में हुए आतंकवादी हमले के बाद से ही पाकिस्तान के प्रति काफी सख्त रवैया अपना  हुए है| भारत कई अंतर्राष्ट्रीय मंचों से पाकिस्तान को आतंकवाद को पनाह देने वाला देश साबित कर चुका है और यह भी कह चुका है की जबतक पाकिस्तान आतंकवाद के खिलाफ कारवाई नहीं करता तब तक उसके साथ कोई बातचीत नहीं होगी|

एससीओ में शामिल देश

शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) का गठन 15 जून 2001 को हुआ, तब उस समय चीन, रूस और चार मध्य एशियाई  देशों कजाकिस्तान, किर्गिस्तान,  तजाकिस्तान और उज़बेकिस्तान के नेताओं ने शंघाई सहयोग संगठन की स्थापना की।

इस संगठन का मुख्य उद्देश्‍य नस्लीय और धार्मिक चरमपंथ से निबटने और व्यापार-निवेश बढ़ाना था। वर्तमान में एससीओ में आठ सदस्य देश हैं जिनमें चीन, कजाकिस्तान,  किर्गिस्तान, रूस,  तजाकिस्तान, उज्बेकिस्तान, भारत और पाकिस्तान शामिल हैं। इसके अलावा चार ऑब्जर्वर देश अफ़गानिस्तान, बेलारूस, ईरान और मंगोलिया हैं। भारत और पाकिस्तान को इस संगठन में 2017 में शामिल किया गया था। एससीओ में चीन, रूस के बाद भारत तीसरा सबसे बड़ा देश है। भारत का कद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ रहा है। एससीओ को इस समय विश्व का सबसे बड़ा क्षेत्रीय संगठन माना जाता है। हालांकि एससीओ पर पूरी तरह से चीन का कब्जा है, लेकिन जिस प्रकार विश्व का शक्ति संतुलन बदल रहा है, उसमें इस संगठन में अपनी पहुंच बढ़ाकर भारत कई प्रकार का लाभ उठाने में कामयाबी हासिल कर सकता है।

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