राष्ट्रीय

केंद्र सरकार के प्रति बदल रहा केजरीवाल का रवैया…….

अरविन्द केजरीवाल ने जब से दिल्ली की गद्दी संभाली है तब से वे केंद्र की मोदी सरकार पर हमलावर हैं| उन्होंने अनेकों बार सार्वजानिक मंचों से दिल्ली का विकास नहीं होने का कारण केंद्र सरकार को बताया है| दिल्ली के उप-राज्यपालों के साथ भी उनका छत्तीस का आंकड़ा रहा है| पिछले लोकसभा चुनावों में भी केजरीवाल ने अपने तरफ से पूरी कोशिश कि की केंद्र में सरकार बदले| लेकिन मोदी सरकार के पुनः सत्ता में वापसी के बाद से केजरीवाल नए रंग में दिख रहे हैं| पहले तो उन्होंने प्रधानमंत्री को जीत की बधाई दी, उनके शपथग्रहण में भी शामिल हुए| सरकार गठन के कई दिनों बाद अरविन्द केजरीवाल प्रधानमंत्री से मिलने भी पहुंचे| पिछले पांच सालों में दिल्ली में ही रहने के बावजूद केजरीवाल की नरेंद्र मोदी से यह सिर्फ दूसरी मुलाकात थी| खैर, केजरीवाल ने प्रधानमंत्री से मिलकर दिल्ली में हो रहे विकास कार्यों की जानकारी दी तथा दिल्ली के विकास में केंद्र सरकार का सहयोग मांगा| केजरीवाल ने प्रधानमंत्री को दिल्ली सरकार द्वारा चलाई जा रही मुहल्ला क्लिनिक को देखने का प्रस्ताव दिया और आग्रह किया|

प्रधानमंत्री से मिलने के बाद अरविन्द केजरीवाल 27 जून को देश की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से भी मिलने पहुंचे| पांच जुलाई को 2019-20 का बजट पेश हो चुका है |बजट पेश होने से पहले केजरीवाल इसी संबंध में वित्त मंत्री से मिले| केजरीवाल ने वित्त मंत्री से बजट में दिल्ली को तरजीह देने का आग्रह किया| केजरीवाल ने बताया कि दिल्ली सरकार केंद्र को 1.50 लाख करोड़ रुपये का इनकम टैक्स देती है। जबकि दिल्ली को इसमें से कुल 325 करोड़ मिलता है। यह रकम 2003 से बढ़ाई नहीं गई है। केजरीवाल ने वित्तमंत्री से आग्रह किया की दिल्ली को भी दूसरे राज्यों की तरह कर में से हिस्सा मिले। केजरीवाल ने वित्त मंत्री से दिल्ली में निवेश बढ़ाने की भी मांग की, केजरीवाल ने कहा की अगर दिल्ली में ज्यादा निवेश होगा तो केंद्र को और ज्यादा कर इनकम टैक्स के रूप में दिल्ली से मिलेगा| केजरीवाल ने वित्त मंत्री से अन्य राज्यों के नगर निगमों की तरह दिल्ली की नगर निगमों के लिए भी अनुदान की मांग की| इसके अलावा दिल्ली का 3000 करोड़ रुपये आईजीएसटी का केंद्र के पास रखा हुआ है। इसे जारी करने की मांग भी केंद्रीय मंत्री से की गई। केजरीवाल ने वित्त मंत्री से मुलाकात के बाद कहा कि वित्त मंत्री ने उन्हें पूरा भरोसा दिलाया है की वे बजट में दिल्ली का ध्यान रखेंगी|

क्यों बदला केन्द्र सरकार के प्रति केजरीवाल का रुख

अरविन्द केजरीवाल को शायद समझ आ गया है की वे दिल्ली के विकास के लिए लाखों वादे कर लें लेकिन संविधान ने जो केंद्र और राज्य के संबंधों की रूप रेखा खिंची है उसके विरूद्ध जाकर या यूँ कहे की केंद्र सरकार का विरोध करके वे दिल्ली का विकास कर पाने में सक्षम नहीं हो पाएंगे| केंद्र सरकार देश की सर्व समर्थ सत्ता होती है और देश के किसी भी राज्य के विकास में उसका महत्वपूर्ण योगदान होता है और फिर दिल्ली तो केन्द्रशासित राज्य भी है| यहाँ राज्य सरकार के पास सीमित शक्तियां और संसाधन हैं जो राज्य के विकास के लिए पर्याप्त नहीं है| राज्य में चुनाव भी नजदीक हैं, केन्द्रीय बजट भी पेश होने वाला है| इन सारी परिस्थितियों को समझने के बाद  केजरीवाल ने शायद केंद्र सरकार से अपने संबंध ठीक करने में ही भलाई समझी है ताकि वे दिल्ली के विकास के लिए केंद्र सरकार से अधिक सहयोग की अपेक्षा रख सकें|

 

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