राष्ट्रीय

यमुना पर पुल निर्माण की डेडलाइन बढ़ी

राजधानी दिल्ली में यमुना नदी पर बने ऐतिहासिक “लोहे का पुल”  के बराबर में रेलवे पुल का निर्माण कार्य 21 वर्षों से चल रहा है। लेकिन अभी तक पूरा नहीं हो पाया है। अब इसकी समय सीमा दिसंबर 2020 तय की गई है।

राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली में यमुना नदी पर 9 पुल बने हैं। जिनमें से ऐतिहासिक “लोहे का पुल” सबसे पुराना पुल है। यह पुल अंग्रेजों ने दिल्ली को कोलकाता से जोड़ने के लिए वर्ष 1866 में बनवाया था। उस वक्त सिर्फ नॉर्थ लाइन का ही निर्माण हुआ था उसके बाद 1913 में दूसरी लाइन, साउथ लाइन बनाई गई। इस पुल की भार उठाने की क्षमता बढ़ाने के लिए ब्रिटिश कंपनी ब्रेवेट एंड कंपनी (इंडिया) लिमेटेड ने वर्ष 1933-34 मे पुल को स्टील गार्डर में बदला था।

अंग्रेजों के अनुसार लोहे के पुल की समय सीमा आजादी के पहले ही समाप्त हो जानी थी। लेकिन आजादी के 72 साल बाद भी इस पुल पर आवागमन जारी है। इसके ऊपर रेल और सड़क दोनों प्रकार के यातायात की सुविधा है।  यह पुल पुरानी दिल्ली इलाके से शाहदरा जाने वालों के लिए एकमात्र सहारा है। इसके ऊपर से रोजाना 160 से ज्यादा ट्रेने गुजरती है। ट्रेने भी इसकी जर्जर स्थिति को देखते हुए इसके ऊपर बहुत धीमे गति से चलती हैं। मॉनसून के दिनों में यमुना नदी का जलस्तर बढ़ने से इसके ऊपर चलने वाले यातायात को कई बार बंद करना पड़ता है। जिसके कारण कई ट्रेने रद्द हो जाने से यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। इसके बावजूद रेल प्रशासन इसका विकल्प नहीं खोज पाया है।

इसके विकल्प के रूप में बन रहे पुल की वास्तु स्थिति

ऐसा नहीं है की सरकार ने इस जर्जर पुल के विकल्प में किसी अन्य पुल के निर्माण के बारे में नहीं सोंचा है| वर्ष 1998 में रेलवे ने पुराने लोहे पुल के समानांतर पुरानी दिल्ली और शाहदरा के बीच नया पुल बनाने का प्रस्ताव तैयार किया था। जिसे वर्ष 2005 में बनकर तैयार हो जाना था लेकिन अफ़सोस 21 सालों बाद भी सरकार यह पुल नही बना पाई है। जून 2019 में इस पुल को पूरा करने की बात कही गई थी लेकिन अभी तक इसे पुरा नहीं किया गया है। अब सरकार द्वारा इस पुल के निर्माण की समय सीमा दिसंबर 2020 तक निर्धारित की गई है।

पुल निर्माण में देरी के कारण

1.पुल के लिए रेलवे ट्रैक सलीमगढ़ किले के अंदर से निकालने की योजना थी| लेकिन पुरात्तव विभाग ने इसकी  मंजूरी नही दी। इसके कारण काम काफी समय तक बाधित रहा|

2. काम जब पुनः शुरू हुआ तो पिलर के लिए गड्ढे खोदने के दौरान चट्टान मिलने के कारण काम रूक गया था।
चट्टानों के मिलने के कारण कार्य में आई बाधा को आईआईटी के प्रोफेसरों की मदद से दूर किया गया और फिर काम शुरू हुआ|

लोहे के पुल पर कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है। इस पुल की हालत काफी खराब है। इसके नीचे यमुना नदी में लोगों ने झुग्गी डाल रखी है। और सब्जी व मछली का बाजार लगता है। कई गोशाला पुल के पास चल रही है। यह पुल इतना पुराना है कि कभी भी गिर सकता है इसलिए यहां रहने वाले लोगों के जीवन के ऊपर खतरा मंडरा रहा है। प्रशासन समय-समय पर इसकी मरम्मत करा देता है लेकिन यह इस समस्या का विकल्प नही है। जल्द से जल्द नए पुल के काम को पुरा करने की कोशिश करनी होगी, जिससे वहां रहने वालों लोगों को हादसे से बचाया जा सकें।

दिल्ली में सिर्फ यह पुल ही ऐसा पुल नही है जिसे बनाने में इतना समय लग रहा हो इससे पहले भी यमुना पर बना सिग्नेचर ब्रिज भी 20 साल के बाद तैयार हो पाया था।

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