धार्मिक

देवों की भूमि उत्तराखंड़

उत्तराखंड़ राज्य देवों की धरती, इसे देवभूमि के नाम से भी जाना जाता है क्योंकि कहा जाता है कि यहां कई ऐसे स्थल है जिसमें देवता वास करते है। कहते है चार धाम यात्रा करने से सारे पाप धूल जाते है। वो गंगोत्री, यमुनोत्री, बद्रीनाथ, केदारनाथ यह चारो तीर्थ स्थल भी उत्तराखंड राज्य में स्थित है। यहां साधु-संतो का हमेशा जमावड़ा रहता है। देवभूमि का प्रवेश द्वार हरिद्वार है। यह राज्य हमेशा तीर्थयात्रियों के आकर्षण का केन्द्र रहा है। यहां सैलानी दूर-दूर से अपनी छट्टियां बिताने आते है। पर्यटन से भरपूर इस राज्य में वॉटर स्पोर्ट्स लोगों के मन मोह लेते है। पहाड़ी राज्य होने पर यहां प्रकृति की छटा लोकलुभावन होती है। उत्तराखंड़ राज्य में कई नदियों का संगम होता है। जिन्हें सनातन धर्म में बहुत ही पवित्र माना जाता है। जिस जगह इनका संगम होता है उन्हें प्रयाग कहा जाता है। लोग इन्हें तीर्थ मानकर पूजते है।

  1. विष्णु प्रयाग

यह विष्णु-गंगा और अलकनंदा नदियों का संगम स्थल है। यह प्रयाग स्थल चार धाम तीर्थ बद्रीनाथ के नजदीक स्थित है। इस प्रयाग के दाएं तरफ “जय” नाम का पर्वत है वहीं बाईं ओर “विजय” नाम का पर्वत है, जिन्हें भगवान विष्णु के द्वारपालों के रूप में जाना जाता है।

पौराणिक कथाओं के अनुसार इसी संगम स्थल पर देवर्षि नारद ने भगवान विष्णु की तपस्या की थी। और यहां भगवान विष्णु का भव्य मंदिर भी स्थित है। इस मंदिर का निर्माण इंदौर की महारानी अहिल्याबाई ने करवाया था। स्कंद पुराण के अनुसार विष्णु-गंगा और अलकनंदा नदी में 5-5  कुंडो का वर्णन किया गया है।

इस स्थान पर इन दोनों नदियों के पानी का वेग बहुत तीव्र होता है इसलिए यहां रिवर राफ्टिंग करना बहुत कठिन है। लेकिन नदियों के दोनों तरफ घने जंगलो को देखने का बहुत सुखद अनुभव होता है। आप यहां प्रकृति का आनंद ले सकते हैं।

  1. नंद प्रयाग-

यहां नंदाकिनी और अलकनंदा का संगम होता है। अध्यात्मिक, पर्यटन और दार्शनिक के लिहाज से प्रयाग अपनी अलग पहचान बनाता है।

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार इस स्थान पर नंद महाराज ने भगवान विष्णु को पुत्र रूप में पाने के लिए तपस्या की थी। साथ ही यहां नंदा देवी का भी एक बड़ा भव्य मंदिर है। संगम पर देवों के देव महादेव का दिव्य मंदिर है और लक्ष्मीनारायण का मंदिर व गोपाल जी का मंदिर भी यहां स्थित है।

अलकनंदा नदी के तरफ फैले घने पहाडी जंगल, ट्रेकिंग, नाइट कैंपेनिंग के लिए प्रसिद्ध हैं।

  1. कर्ण प्रयाग

पिंडारी और अलकनंदा नदियों के संगम पर कर्ण प्रयाग स्थित है। कर्ण ने यहां तपस्या की थी इसलिए इस स्थान का नाम कर्णप्रयाग पड़ा।

कहा जाता है कि इस भूमि पर ही कर्ण ने भगवान सूर्य की आराधना की थी और आशीर्वाद में उनसे अभेद्य कवच और कुंडल प्राप्त किए थे। इसी कारण यहां स्नान करने के बाद दान करने का रिवाज है।संगम से पश्चिम की ओर शिलाखंड के रूप में कर्ण का तप स्थान और मन्दिर स्थित है।

कर्णप्रयाग से कुमाऊं तक भी एक रास्ता जाता है। प्रकृति प्रेमियो के लिए यह जगह बिल्कुल उपयुक्त है।

  1. रूद्र प्रयाग

मंदाकिनी और अलकनंदा नदी के संगम पर रूद्र प्रयाग स्थित है। भगवान शिव के रूद्र नाम पर इस जगह का नाम रूद्रप्रयाग पड़ा। संगम के ऊपर महादेव का रूद्रेश्वर नामक शिवलिंग है। जिसके दर्शन करने मात्र से पुण्य की प्राप्ति होती है।

पौराणिक कथाओं के अनुसार ऐसा माना जाता है कि ब्रह्म्मा जी की अनुमति लेकर देवर्षि नारद ने हजारों वर्षों की तपस्या के बाद भगवान शंकर के दर्शन करके सांगोपांग गांधर्व शास्त्र प्राप्त किया था।

संगम स्थल पर स्थित रूद्रनाथ मंदिर में शाम की आरती बहुत प्रसिद्ध है। यहां से 3 किमी दूरी पर काटेश्वर महादेव का मंदिर स्थित है।

  1. देव प्रयाग

यहां भागीरथी और अलकनंदा का संगम होता है। यहां से आगे इन दोनों नदियों की संयुक्त धारा को गंगा के नाम से जाना जाता है। गढ़वाल इलाके में भागीरथी को उसके कोलाहल आगमन के कारण सास और अलकनंदा के शांत स्वरूप को देखते हुए इसे बहु की संज्ञा दी गई है। यहां शिव और रघुनाथ मंदिर स्थित हैं। देवप्रयाग में कौवे नही दिखाई देते। स्कंद पुराण के केदारखंड में इस तीर्थ का वर्णन मिलता है, कि देवशर्मा नामक ब्राह्मण ने सतयुग में सूखे पत्ते चबाकर और एक पैर पर खड़ा होकर एक हजार सालों तक तपस्या की। तब जाकर भगवान विष्णु ने दर्शन दिए और उसे वरदान प्राप्त हुआ। मान्यता है कि भागीरथ ऋषि के कठोर प्रयासों के बाद ही गंगा धरती पर आने को राजी हुई थी। और इसी स्थान पर वह सर्वप्रथम प्रकट हुई थी।

पर्यटन और अध्यात्मिक शांति के लिए यह स्थान सबसे उपयुक्त है। यहां कई तरह की एडवैंचर एक्टिविटी का मजा लिया जा सकता है। मानसिक शांति के लिए यह स्थान बहुत लाभदायक है। प्रकृति प्रेमी यहां के खुबसूरत जंगलों में नाइट कैंपिंग और ट्रैकिंग का मजा ले सकते है। एडवेंचर के शौकीन लोग यहां पानी के खेलों का लुत्फ उठा सकते हैँ।

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