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बांसुरी के पर्याय……हरिप्रसाद चौरसिया 

बांसुरी की जब भी बात चलती है तो कृष्ण याद आते हैं| मगर जरा सोंचिए अगर कृष्ण को बांसुरी सुननी होती होगी तो वे किसे सुनते होंगे| इसका जवाब है…..हरिप्रसाद चौरसिया को| हरिप्रसाद चौरसिया आज की तारीख में बांसुरी के पर्याय माने जाते हैं| बांसुरी का मतलब हरिप्रसाद चौरसिया और हरिप्रसाद चौरसिया का मतलब बांसुरी| हरिप्रसाद चौरसिया ने अपनी अथक मेहनत और लगन से बांसुरी को पूरी दुनिया में पहुँचाया है और लोगों के जीवन में बांसुरी के प्रति मोह और प्रेम उत्पन्न किया है| जीवन के सारे राग हरि जी के बांसुरी से निकलते हैं, जिसे सुनने वाले बस उसी में खो जाते हैं| हरिप्रसाद की बांसुरी की धुन जीवन के तमाम उलझनों से निकालकर हमारी चेतना को उस स्तर पर ले जाती है जहाँ सिर्फ और सिर्फ आनंद होता है, मधुरता होती है| देश विदेश में अपनी बांसुरी की मधुर तानों से करोड़ों लोगों को सराबोर कर देने वाले पंडित जी उन विरले लोगों में से एक हैं जो जीते जी किवदंती बन जाते हैं|

जन्म, बचपन, और बांसुरी से मुलाकात

1 जुलाई, 1938 को उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद(प्रयागराज) में जन्में हरिप्रसाद का बचपन बनारस में गंगा के किनारे बीता| हरिप्रसाद तब बहुत छोटे थे जब उनकी माता जी का देहांत हो गया| उसके बाद उनकी देखभाल उनके पहलवान पिता ने की| पिता चाहते थे की बेटा पहलवान बने लेकिन बेटे को संगीत से प्रेम हो गया था| पिता को बिना बताए हरिप्रसाद अपने पड़ोस के ही गुरु राजाराम से संगीत सीखने लगे| संगीत में बढ़ती रूचि के कारण वे उस समय के दिग्गज बांसुरी वादक पंडित भोलानाथ प्रसन्ना के पास पहुँच गए| जहाँ से उन्होंने विधिवत रूप से बांसुरी की शिक्षा ली| बाद में हरिप्रसाद चौरसिया ने महान शास्त्रीय संगीतज्ञ अन्नपूर्णा देवी से भी संगीत सीखा| संगीत सीखने के दौरान परिवार का खर्च उठाने के लिए उन्होंने एक जगह टाइपिस्ट की नौकरी भी की|

बांसुरी वादक के रूप में पहचान

शास्त्रीय संगीत की तालीम लेने के बाद हरिप्रसाद ने ऑल इण्डिया रेडियो के साथ काम किया| देश और विदेश में अनेकों सांस्कृतिक कार्यक्रमों में अपनी प्रस्तुतियां दी| अनेकों फिल्मी गीतों के लिए अपनी बांसुरी के सुर दिए| अपने उत्कृष्ट और मधुर बांसुरी वादन से हरिप्रसाद ने खूब शोहरत और दौलत कमाई|

फिल्मों में संगीत

हिंदी सिनेमा में भी पंडित हरिप्रसाद चौरसिया का योगदान बहुमूल्य है| उन्होंने संतूर वादक शिव कुमार शर्मा के साथ शिव-हरि की जोड़ी के रूप में फिल्मों में अत्यंत मधुर संगीत दिया| इस जोड़ी द्वारा बनाए गए गीत आज भी लोगों के जुबान पर तैरते हैं| इस जोड़ी की कुछ चुनिंदा फ़िल्में हैं- चांदनी, डर, लम्हे, सिलसिला, फासले, विजय और साहिबान आदि|

लाइव कार्यक्रम

फिल्मों में सफलता के बावजूद हरिप्रसाद का पहला प्रेम शास्त्रीय संगीत और स्टेज शो ही रहा| जिसके कारण पूरी दुनिया में उनके करोड़ों कद्रदान हैं|

एल्बम

पंडित हरिप्रसाद चौरसिया ने अनेकों एल्बम निकाले हैं जो शास्त्रीय संगीत के रागों पर आधारित हैं| सुबह, शाम, दोपहर, रात, नदी, पहाड़, वर्षा, प्रेम, विरह हर तरह के धुन से सजे एल्बम हरिप्रसाद चौरसिया ने अपने चाहनेवालों के लिए निकाले हैं|

निवास

भारत सहित विश्व के अनेकों दिग्गज कलाकारों के साथ काम कर चुके पंडित जी फिलहाल पूना में रहते हैं| यहीं से वे अपने कार्यक्रमों के साथ-साथ बांसुरी की अगली पीढ़ी तैयार कर रहे हैं| उनके शिष्य उन्हें भगवान से कम नहीं मानते हैं|

महत्वपूर्ण सम्मान

पंडित हरिप्रसाद चौरसिया को संगीत के क्षेत्र में उनके अभूतपूर्व व अतुलनीय योगदान के लिए देश विदेश में अनेकों पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है| भारत सरकार की तरफ से शास्त्रीय संगीत में महत्वपूर्ण योगदान देने के लिए हरिप्रसाद चौरसिया को पद्म भूषण, पद्म विभूषण, यश भारती और संगीत नाटक अकादमी जैसे पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है। फ़्रांस की सरकार ने भी पंडित जी को संगीत के क्षेत्र में उनके विशिष्ट योगदान के लिए “Knight of the order of Arts and Letters” के पुरस्कार से नवाजा है| यह पुरस्कार उन्हें दिया जाता है जो अपनी कला और साहित्य के क्षेत्र में अपनी रचनात्मकता से विशिष्ट योगदान देते हैं|

हमारी यही कामना है कि पंडित हरिप्रसाद चौरसिया दीर्घायु हों और अपनी मधुर तान से पूरी दुनिया को मंत्रमुग्ध करते रहें|

हरिप्रसाद चौरसिया, नाम सुनते ही कानों में बांसुरी की मधुर ध्वनि गूंजने लगती है। बांस की बनी साधारण सी बांसुरी जब हरिप्रसाद के हाथो में होती है तो इस बांसुरी में मानव मन को मोह लेने वाली असाधारण शक्तियां आ जाती हैं। शास्त्रीय संगीत में महत्वपूर्ण योगदान देने के लिए हरिप्रसाद चौरसिया को पद्म भूषण, पद्म विभूषण, यश भारती और संगीत नाटक अकादमी जैसे पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है। बांसुरी के जादूगर और शास्त्रीय संगीतकार हरिप्रसाद चौरसिया का जन्म 1 जुलाई 1938 को उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद (वर्तमान प्रयागराज) में हुआ था।

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