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अनमोल व यादगार नगमों को रचने वाले ‘खय्याम’ नहीं रहे

हिन्दी सिनेमा के मशहूर संगीतकार ‘खय्याम’ का सोमवार दिनांक 19-8-2019 को मुंबई के एक अस्पताल में निधन हो गया| वे 92 वर्ष के थे और लम्बे समय से बीमार चल रहे थे| 18 फ़रवरी 1927 को अविभाजित पंजाब के राहोन में जन्मे ‘खय्याम’ का वास्तविक नाम मोहम्मद ज़हूर खय्याम हाशमी था, लेकिन वे खय्याम के नाम से ही प्रसिद्ध हुए|

बचपन से ही संगीत में रूचि रखने वाले खय्याम साहब ने लम्बे संघर्ष के बाद हिन्दी सिनेमा में अपना स्थान बनाया था| खय्याम साहब ने हिन्दी सिनेमा को एक से बढ़कर एक बेहतरीन नगमे दिए, जो आज भी लोगों के जुबान चढ़े रहते हैं| खय्याम साहब ने हिन्दी सिनेमा में चाहे जितना भी काम किया हो लेकिन पूरी फिल्म इंडस्ट्री उन्हें एक गुणी संगीतकार के रूप में मानती थी और आदर करती थी| फ़िल्मी गीतों के अलावा खय्याम ने सैकड़ों गजलों की धुनें बनाई| ग़ज़ल गाने और लिखने वालों के लिए तो खय्याम साहब किसी पीर से कम न थे| 

खय्याम साहब द्वारा बनाए कुछ बेहतरीन नगमें हैं :-

  • अकेले में वह घबराते तो होंगे
  • कभी-कभी मेरे दिल ख्याल आता है
  • मैं पल दो पल का शायर हूँ
  • इन आँखों की मस्ती के मस्ताने हजारों हैं
  • तेरे चेहरे से नज़र नहीं हटती
  • मोहब्बत बड़े काम चीज़ है
  • दिल चीज़ क्या है
  • ए दिले नादां
  • कभी किसी को मुकम्मल जहाँ नहीं मिलता
  • खुबसूरत हैं आंखें तेरी ….(ग़ज़ल)

 2011 में पद्म भूषण पुरस्कार से सम्मानित खय्याम साहब को फिल्म उमराव जान में बेहतरीन संगीत देने के लिए राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार से सम्मानित किया गया था| इसके अलावा फिल्म कभी कभी, उमराव जान के लिए उन्हें फिल्म फेयर पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया था| उन्हें संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार और हृदयनाथ मंगेशकर पुरस्कार भी मिल चुका है| खय्याम ने अपने 90 वें जन्मदिन पर अपनी 10 करोड़ की संपत्ति उन संगीतकारों के लिए दान कर दी थी, जो फिल्मों में स्थान बनाने के लिए संघर्षरत हैं| खय्याम साहब अपने पीछे अपनी पत्नी जगजीत कौर छोड़ गए हैं| उनके निधन पर फ़िल्मी दुनिया सहित समाज के सभी वर्गों के लोगों ने अपनी शोक संवेदना प्रकट की है|

 

 

 

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