राष्ट्रीय

मॉब लिंचिंग के खिलाफ बंगाल में कानून…

राज्य में आए दिन हो रही मॉब लिंचिंग की घटनाओं को रोकने के उद्देश्य से बंगाल की ममता बनर्जी सरकार ने मॉब लिंचिग के विरुद्ध कानून बनाने का फैसला लिया है| कानून बनने के बाद बंगाल भारत में राजस्थान और मणिपुर के बाद ऐसा तीसरा राज्य होगा जिसके पास मॉब लिंचिंग के विरुद्ध कानून होगा|

इससे संबंधित द वेस्ट बंगाल (प्रीवेंशन ऑफ़ लिंचिंग) बिल, 2019 विधानसभा के मौजूदा अधिवेशन के दौरान इसी सप्ताह पेश किया जाएगा| बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा की यह कानून सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार ही बन रहा है| गौरतलब है कि मॉब लिंचिंग की बढती घटनाओं पर रोकथाम के उद्देश्य से सुप्रीम कोर्ट ने बीते वर्ष सभी राज्यों को मॉब लिंचिंग के विरूद्ध कानून बनाने का आदेश दिया था|

बंगाल के संसदीय कार्य मंत्री पार्थ चटर्जी कहते हैं, “इस विधेयक का मक़सद संवेदनशील लोगों के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा करना और भीड़ के हाथों पिटाई की घटनाओं पर अंकुश लगाना है| इसमें ऐसे मामलों में शामिल लोगों के ख़िलाफ़ कार्रवाई का भी प्रावधान होगा|”

मंत्री के अनुसार कानून में निम्न प्रावधान हो सकते हैं:-

  • किसी पर हमला करने और उसे घायल करने के दोषी लोगों को तीन साल से लेकर आजीवन सज़ा तक का प्रावधान होगा|
  • भीड़ की पिटाई से संबंधित व्यक्ति की मौत की स्थिति में दोषियों को आजीवन कारावास की सज़ा के साथ ही पांच लाख रुपए तक का जुर्माना भी भरना होगा|
  • ऐसे किसी भी मामले में दो या उससे ज्यादा लोगों के शामिल होने की स्थिति में इसे भीड़ की श्रेणी में रखा जाएगा|
  • विधेयक में भीड़ के पिटाई के शिकार लोगों या उनके परिजनों को मुआवज़ा देने का भी प्रावधान है|
  • ऐसे मामलों में शामिल होने और इसकी साज़िश रचने वाले लोगों के अलावा उकसावा देने वालों के ख़िलाफ़ भी इसी क़ानून के तहत कार्रवाई की जाएगी|
  • विधेयक में भीड़ के पिटाई के शिकार लोगों या उनके परिजनों को मुआवज़ा देने का भी प्रावधान है|

पार्थ चटर्जी ने कहा की इस कानून के पारित होने के बाद राज्य के पुलिस महानिदेशक द्वारा एक अधिकारी की नियुक्ति की जाएगी, जो इस तरह की घटनाओं पर नज़र रखेगा|

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