राष्ट्रीय

अब विवादित नहीं रही राम जन्मभूमि, सुप्रीम कोर्ट ने सुनाया राम मंदिर के पक्ष में फैसला

देश में सबसे लम्बे समय तक चलने वाले, सबसे ज्यादा संवेदनशील और करोड़ों लोगों की आस्था से जुड़े  अयोध्या के राम जन्मभूमि मामले पर आज सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुना दिया है| सुप्रीम कोर्ट ने विवादित भूमि पर राम मंदिर के पक्ष में अपना फैसला सुनाया है| पांच जजों की बेंच द्वारा सर्वसम्मति से लिए गए फैसले को सुनाते हुए सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई ने कहा कि विवादित ज़मीन पर मुस्लिम पक्ष अपने दावे को साबित करने में सफल नहीं हो पाया| विवादित जमीन पर अतीत में मस्जिद के साक्ष्य नहीं मिले हैं| यह जमीन निर्विवाद रूप से मंदिर की है और इस पर मंदिर ही बनेगा| मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई ने कहा कि ढहाए गए ढांचे के नीचे एक मंदिर था, इस तथ्य की पुष्टि आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (एएसआई) कर चुका है। पुरातात्विक प्रमाणों को महज एक ओपिनियन करार देना एएसआई का अपमान होगा। प्राचीन यात्रियों के संस्मरण और तमाम धार्मिक किताबें इस बात का प्रमाण प्रस्तुत करती हैं की अयोध्या राम की जन्मस्थली रही है| मुसलमान भी इस बात को मानते हैं| यहाँ इस बात के भी सबूत मिले हैं कि राम चबूतरा और सीता रसोई पर हिंदू अंग्रेजों के जमाने से पहले भी पूजा करते थे। रिकॉर्ड में दर्ज साक्ष्य बताते हैं कि विवादित जमीन का बाहरी हिस्सा हिंदुओं के अधीन था। इसलिए विवादित जमीन पर मालिकाना हक मंदिर का होगा|

राम जन्मभूमि फैसले पर 1045 पन्नों की रिपोर्ट बनाई गई है, जिसके 116 वें पेज पर राम मंदिर का जिक्र है| सुप्रीम कोर्ट ने विवादित जमीन को केंद्र सरकार के रिसीवर को सौंपते हुए अगले तीन महीने में ट्रस्ट बना कर मंदिर निर्माण कार्य शुरू करने का आदेश दिया है| सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार मंदिर का निर्माण ट्रस्ट की देखरेख में होगा| शीर्ष अदालत ने मंदिर पर निर्मोही अखाड़े के दावे को ख़ारिज करते हुए उसे राम मंदिर निर्माण के लिए बनने वाले ट्रस्ट में प्रतिनिधित्व देने का आदेश दिया है|

मुस्लिम पक्ष को पांच एकड़ ज़मीन

सुप्रीम कोर्ट ने मुस्लिम पक्ष सुन्नी वक्फ बोर्ड को अयोध्या में ही किसी अन्य महत्वपूर्ण स्थान पर 5 एकड़ भूमि देने का आदेश केंद्र और राज्य सरकार को दिया है| यह विवादित जमीन से लगभग दोगुना है| मस्जिद निर्माण के लिए भी अगले तीन महीने में ट्रस्ट बनाने का आदेश शीर्ष अदालत ने दिया है|

दोनों पक्षों की राय

हिन्दू पक्षकारों ने शीर्ष अदालत के इस फैसले का स्वागत किया है|पहले मुस्लिम पक्ष इस फैसले से संतुष्ट नहीं दिख रहा था लेकिन हालिया घटनाक्रम के अनुसार सुन्नी वक्फ बोर्ड ने इस फैसले में पुन: किसी भी तरह के अपील से इन्कार किया है तथा शीर्ष अदालत के फैसले को स्वीकार करने की बात कहीं है। 

शीर्ष नेताओं के बयान

नरेंद्र मोदी – देश के सर्वोच्च न्यायालय ने अयोध्या पर अपना फैसला सुना दिया है। इस फैसले को किसी की हार या जीत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। रामभक्ति हो या रहीमभक्ति, ये समय हम सभी के लिए भारतभक्ति की भावना को सशक्त करने का है। देशवासियों से मेरी अपील है कि शांति, सद्भाव और एकता बनाए रखें।

अमित शाह – श्रीराम जन्मभूमि पर सर्वसम्मति से आये सर्वोच्च न्यायालय के फैसले का मैं स्वागत करता हूँ। मैं सभी समुदायों और धर्म के लोगों से अपील करता हूँ कि हम इस निर्णय को सहजता से स्वीकारते हुए शांति और सौहार्द से परिपूर्ण ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ के अपने संकल्प के प्रति कटिबद्ध रहें।

राजनाथ सिंह – सर्वोच्च न्यायालय का अयोध्या पर निर्णय ऐतिहासिक है।यह निर्णय भारत के सामाजिक ताने-बाने को और मजबूत करेगा। मुझे विश्वास है कि सभी लोग धैर्य एवं उदारता के साथ इस फ़ैसले को स्वीकार करेंगे। मैं लोगों से अपील करता हूं कि इस फैसले के बाद शांति और सौहार्द बनाए रखें |

मोहन भागवत – हम इस फैसले का स्वागत करते हैं और सम्पूर्ण देशवासियों से भव्य राम मंदिर के निर्माण में सहयोग देने की अपील करते हैं|

असदुद्दीन ओवैसी – हम इस फैसले से संतुष्ट नहीं हैं, सुप्रीम कोर्ट द्वारा दी गए पांच एकड़ भूमि के ऑफर को ठुकरा देना चाहिए|   

 

(पंकज कुमार, मीडिया दरबार)

 

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