राष्ट्रीय

अयोध्या राम जन्मभूमि आंदोलन के छः बड़े किरदार

लालकृष्ण आडवाणी

देश के पूर्व उप प्रधानमन्त्री लालकृष्ण आडवाणी का राम मंदिर आन्दोलन में प्रमुख योगदान है| लालकृष्ण आडवाणी ने ही गुजरात के सोमनाथ से अयोध्या के राम मंदिर तक रथ यात्रा निकाली थी| अयोध्या राम जन्मभूमि आन्दोलन आडवाणी की रथ यात्रा के बाद ही देशव्यापी आन्दोलन बन पाया|

राम जन्मभूमि विवाद का फैसला राम मंदिर के पक्ष में आने के बाद लालकृष्ण आडवाणी ने इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि “उनका रुख सही साबित हुआ, ‘उच्चतम न्यायालय के फैसले से मेरी बातों की पुष्टि हुई, अयोध्या में भव्य राम मंदिर निर्माण के लिये मार्ग प्रशस्त होने से बहुत धन्य महसूस कर रहा हूँ| यह क्षण मेरी कामना पूर्ण होने का है, ईश्वर ने मुझे विशाल आंदोलन में योगदान देने का अवसर दिया जो भारत के स्वतंत्रता आंदोलन के बाद सबसे बड़ा आंदोलन था|’

आडवाणी ने कहा, ‘मैंने हमेशा इस बात पर जोर दिया है कि भारत की संस्कृति और सभ्यता में राम और रामायण का सम्मानित स्थान है| भारत में और विदेश में राम जन्मभूमि एक विशेष और पवित्र स्थान रखती है. उनके विश्वास और भावनाओं का सम्मान किया गया|’

आडवाणी ने कहा, ‘मैं कोर्ट के इस फैसले का भी सम्मान करता हूं कि उन्होंने अयोध्या में मस्जिद बनाने के लिए पांच एकड़ जमीन देने का फैसला किया|’ उन्होंने कहा, ‘आज का निर्णय एक लंबी और विवादास्पद प्रक्रिया की परिणति है, जिसने पिछले कई दशकों में विभिन्न मंचों पर न्यायिक और गैर-न्यायिक दोनों ही भूमिका निभाई|’ कोर्ट के इस फैसले के बाद हिन्दू-मुस्लिम विवाद का अंत हो गया है|

अशोक सिंघल

राम मंदिर निर्माण आंदोलन चलाने के लिए जनसमर्थन जुटाने में अशोक सिंघल की अहम भूमिका रही| कई लोगों की नजरों में वह राम मंदिर आंदोलन के मुख्य करता धर्ता थे| वह 2011 तक विश्व हिन्दू  परिषद् के अध्यक्ष रहे| स्वास्थ्य कारणों से उन्होंने इस पद इस्तीफा दे दिया था| राम मंदिर आन्दोलन के बड़े चेहरे अशोक सिंघल का 17 नवंबर 2015 को उनका निधन हो गया|

मुरली मनोहर जोशी

भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष व देश के पूर्व शिक्षा मंत्री रहे मुरली मनोहर जोशी राम मंदिर आन्दोलन के बड़े चेहरों में से एक हैं| 1992 में बाबरी मस्जिद विध्वंस के समय मुरली मनोहर जोशी भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष थे| छह दिसंबर 1992 को घटना के समय वह विवादित परिसर में मौजूद थे| गुंबद गिरने के बाद उमा भारती ने उन्हें गले लगाया था|

जोशी ने राम मंदिर विवाद पर मंदिर के पक्ष में फैसला आने के बाद सभी लोगों को इस फैसले का सम्मान करना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद देश को आगे बढ़ना है, पीछे नहीं देखना है। जोशी बोले, मेरे लिए यह विशेष तौर पर खुशी एवं गौरव का पल है, क्योंकि मैं भी भाजपा के तत्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्ष के तौर पर राम मंदिर मामले के साथ जुड़ा रहा हूँ।

जोशी ने कहा की अब दोनों समुदायों के बीच कोई विवाद नहीं बचा है। राम मंदिर का निर्माण करने के लिए न्यास को जमीन मिल रही है, तो वहीं मस्जिद बनाने के लिए भी जमीन दे दी गई है। यह हमारे देश की परंपरा एवं संस्कृति के अनुकूल है। अब किसी को कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए। उदयमान भारत का सपना अब सार्थक होने जा रहा है। भारत अब दुनिया का नेतृत्व करेगा। देश के सभी लोग सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले को स्वस्थ दृष्टिकोण से स्वीकार करें।

कल्याण सिंह

छह दिसंबर 1992 को जब अयोध्या में मस्जिद ढहाया गया था| उस समय उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री कल्याण सिंह थे| उन पर आरोप है कि उनकी पुलिस और प्रशासन ने जान—बूझकर कारसेवकों को नहीं रोका| कल्याण सिंह का नाम उन 13 लोगों में शामिल था जिन पर मस्जिद गिराने क साज़िश का आरोप लगा था|

कल्याण सिंह ने राम जन्मभूमि पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए फैसले को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि अयोध्या में भव्य राम मंदिर का सपना पूरा होने जा रहा है|

विनय कटियार

राम मंदिर आंदोलन के लिए 1984 में ‘बजरंग दल’ का गठन किया गया था जिसके पहले अध्यक्ष विनय कटियार थे| इनके नेतृत्व में बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने जन्मभूमि आंदोलन को आक्रामक बनाया| कटियार बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव तथा फ़ैज़ाबाद (अयोध्या) से तीन बार लोकसभा के सदस्य रहे हैं|

राम मंदिर विवाद का फैसला होने और फैसला मंदिर के पक्ष आने का इन्होने स्वागत किया है और भव्य राम मंदिर बनाने की मांग की है|

साध्वी ऋतंभरा

साध्वी ऋतंभरा एक समय हिंदुत्व की फायरब्रांड नेता थीं| बाबरी मस्जिद विध्वंस मामले में उनके ख़िलाफ़ आपराधिक साज़िश के आरोप तय किए गए थे| अयोध्या आंदोलन के दौरान उनके उग्र भाषणों के ऑडियो कैसेट पूरे देश में सुनाई दे रहे थे, जिसमें वे विरोधियों को ‘बाबर की आलौद’ कहकर ललकारती थीं|

मामले में फैसला आने के बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के फैसले को स्वर्णिम इतिहास वाला निर्णय करार दिया है। कहा कि, भारत में नया इतिहास रचा गया है। राजनीतिक रुप से भारत को 1947 में आजादी मिल गई थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद सांस्कृतिक रूप से भी आजादी मिल गई है। ये क्षण खुशी देने वाला है। जिसके लिए आंदोलन चलाया, वर्षों इंतजार किया अब उद्देश्य अब पूरा हो गया।अब शीघ्र ही रामलला अपने भव्य मंदिर में विराजमान होंगे।    

 

 

 

 

 

 

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