राष्ट्रीय

 राफेल साफ, राहुल माफ़, सबरीमाला मामला सात जजों की पीठ के हवाले 

 

देश की शीर्ष अदालत ने आज तीन महत्वपूर्ण मामलों में से दो मामलों में अपना फैसला सुनाया है जबकि एक मामले को सात जजों की पीठ के पास भेजा गया है| सुप्रीम कोर्ट को आज राफेल मामले में दायर पुनर्विचार याचिका, सबरीमाला मामला और राहुल गाँधी द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ कहे गए अपशब्दों के माफ़ीनामे पर अपना फैसला सुनाना था| आइये जानते हैं इन तीनों मामलों में सुप्रीम कोर्ट ने क्या फैसला सुनाया है?

सबरीमाला मामला 

सबरीमाला मामले की पुनर्विचार याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों की पीठ ने फैसला सर्वसम्मत ना होने के कारण सात जजों की बेंच को सौंपने का फैसला लिया है|  पीठ ने यह फैसला 3:2 से किया| पुनर्विचार याचिका की सुनवाई कर रही पांच सदस्ययी टीम की अध्यक्षता मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई कर रहे थे| सुनवाई कर रही पीठ के अन्य सदस्य जस्टिस इंदु मल्होत्रा, जस्टिस एएम खानविलकर, जस्टिस फली नरीमन, और जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ थे|

मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई, जस्टिस इंदु मल्होत्रा, जस्टिस एएम खानविलकर ने इस केस को सुनवाई के लिए सात सदस्यों की पीठ के पास भेजा| जस्टिस फली नरीमन, और जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ इसके खिलाफ थे|

मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई ने सबरीमाला पुनर्विचार याचिका पर कहा कि “इस तरह की याचिका दायर करने वाले व्यक्तियों का मकसद धर्म और आस्था के नाम पर वाद-विवाद शुरू कराना है। महिलाओं के धार्मिक स्थलों में प्रवेश पर प्रतिबंध सिर्फ सबरीमाला तक सीमित नहीं, यह दूसरे धर्मों में भी प्रचलित है। सुप्रीम कोर्ट को सबरीमाला जैसे धार्मिक स्थलों के लिए एक सार्वजनिक नीति बनानी चाहिए। सबरीमाला, मस्जिद में महिलाओं के प्रवेश और फीमेल जेनिटल म्यूटिलेशन से जुड़े धार्मिक मुद्दों पर बड़ी बेंच फैसला करेगी।

सुप्रीम कोर्ट ने 28 सितंबर 2018 को सबरीमाला मामले में 4:1 से फैसला सुनाया था | इस फैसले के अनुसार किसी भी उम्र की महिला को मंदिर में प्रवेश करने की अनुमति दी गई थी| इस फैसले पर अपना निर्णय देने के बाद तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा ने कहा था कि 

शारीरिक वजहों से मंदिर आने से रोकना रिवाज का जरूरी हिस्सा नहीं। ये पुरूष प्रधान सोच को दर्शाता है 

 

क्या है सबरीमाला मंदिर विवाद

सबरीमाला मंदिर केरल के पठनामथिट्टा जिले की पहाड़ियों के बीच स्थित है| यह भगवान अयप्पा का मंदिर है|  मान्यता के अनुसार इस मंदिर में उन महिलाओं का प्रवेश वर्जित है, जो माँ बन सकती है| इस लिहाज से इस मंदिर में 10 से 50 वर्ष की महिलाओं का प्रवेश वर्जित है| इसी मान्यता के खिलाफ वहां के महिलाओं ने अपील की थी| 

हालांकि सुप्रीम ने अपने 28 सितंबर 2018 के फैसले में सबरीमाला मंदिर सभी महिलाओं को प्रवेश की अनुमति दी थी, जिसका भारी विरोध हुआ था| लगभग 56 पुनर्विचार याचिकाएं इस फैसले के विरोध में दाखिल की गई थीं| फिलहाल यह मामला सात जजों की पीठ के पास है, जिनको इस पर फैसला लेना है| फैसला आने तक सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिया पुराना निर्णय मान्य होगा|

राफेल मामला

सुप्रीम कोर्ट ने राफेल विमान सौदे पर दायर की गई पुनर्विचार याचिकाओं को कमजोर दलीलों के कारण खारिज कर दिया गया| पुनर्विचार याचिका पूर्व केंद्रीय वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा, अरुण शौरी,  तथा सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने दायर की थी| सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले पर टिप्पणी करते हुए कहा कि उन्हें नहीं लगता है कि इस मामले में किसी एफआईआर या जांच की जरूरत है| राफेल मामले में दायर पुनर्विचार याचिका में विमान सौदे की प्रक्रिया और कीमतों पर सवाल खड़े किए गए थे| इस मामले में मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई, जस्टिस संजय किशन कौल और जस्टिस केएम जोसेफ की पीठ ने फैसला सुनाया है| सुप्रीम कोर्ट राफेल मामले में अपना फैसला पूर्व में दे चुका है| पूर्व में सुप्रीम कोर्ट ने राफेल सौदे में कहा था कि ये मामला राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा है, इसलिए अदालत इसमें दखल नहीं देगा|

राहुल गाँधी का माफीनामा कबूल

राहुल गाँधी ने लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए कहा था कि अब तो शीर्ष अदालत ने भी मान लिया है की चौकीदार चोर है| जिसके विरोध में नई दिल्ली से सांसद मीनाक्षी लेखी ने सुप्रीम कोर्ट में अवमानना केस दाखिल किया था| राहुल गाँधी ने कोर्ट से माफ़ी की मांग की थी, जिसे कोर्ट ने स्वीकार कर लिया है|

 

पंकज कुमार (मीडिया दरबार )

 

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