राष्ट्रीय

नागरिकता संशोधन कानून के विरोध में देश भर में हिंसात्मक प्रदर्शन

विरोध प्रदर्शन से सर्वाधिक प्रभावित है राजधानी दिल्ली, सुरक्षा व्यवस्था हाई अलर्ट पर

पटना, लखनऊ, बेंगलुरु, मुंबई, कलकत्ता में उग्र विरोध प्रदर्शन, पूरे उत्तर प्रदेश में लगी है धारा 144

केंद्र सरकार द्वारा बनाए गए नागरिकता संशोधन कानून के विरोध में पूरे देश में हिंसात्मक प्रदर्शन हो रहे हैं| कहीं बंद का ऐलान किया जा रहा है तो कहीं जनता सड़कों पर उतर कर इस कानून का विरोध कर रही है| भारत की अधिकांश विपक्षी राजनीतिक पार्टियाँ मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस के नेतृत्व में इस कानून का विरोध कर रही हैं| इस कानून के विरोध का आलम यह है कि विपक्षी पार्टियाँ राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से मिलकर कानून को रद्द करने की मांग कर चुकी हैं| विपक्षी पार्टियों का कहना है कि यह कानून देश में वैमश्यता को बढ़ावा देगा तथा धार्मिक कट्टरता को जन्म देकर देश में उन्माद और अपराध को बढ़ावा देगा|

जामिया से निकली विरोध की चिंगारी 

विगत कुछ वर्षों से यह देखा जा रहा है कि केंद्र सरकार जब भी कोई कानून बनाती है या कोई निर्णय लेती है उसका विरोध किसी न किसी प्रतिष्ठित अध्ययन केंद्र से शुरू हो रहा है| केंद्र सरकार द्वारा लाया गया नागरिकता संशोधन विधेयक जब दोनों सदनों से पास होने और राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की मंजूरी मिलने के बाद जब कानून बना | उसी वक़्त से इसका विरोध शुरू हो गया था | लेकिन विरोध को धार मिली दिल्ली स्थित जामिया मिलिया विश्वविद्यालय के छात्रों द्वारा इस कानून के खिलाफ किए गए उग्र प्रदर्शन के बाद| जामिया मिलिया के छात्रों का प्रदर्शन इतना उग्र हो गया की पुलिस को स्थिति नियंत्रण में लाने के लिए लाठीचार्ज और अन्य गतिविधियों का सहारा लेना पड़ा| विभिन्न रिपोर्टों के अनुसार छात्रों ने प्रदर्शन के दौरान पुलिस पर पत्थर बाजी की जिसके बाद पुलिस ने छात्रों पर दंडात्मक कार्यवाही की| रिपोर्टों के अनुसार पुलिस विश्विद्यालय प्रांगण के अन्दर घुस गई तथा पुस्तकालय और अन्य शैक्षिणक गतिविधियों वाले स्थानों पर जाकर विरोध कर रहे छात्रों पर कार्यवाई की | पुलिस की कार्यवाई में सैकड़ों छात्रों के घायल होने की ख़बरें हैं|

पुलिस के हस्तक्षेप के बाद जामिया विश्वविद्यालय का आन्दोलन तो शांत हो गया लेकिन इस आन्दोलन ने पूरे देश में नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ चल रहे विरोध को एक मुखर आवाज़ दे दी|

देशव्यापी विरोध

जामिया मिलिया विश्वविद्यालय आन्दोलन के बाद पूरे देश में व्यापक हिंसक आन्दोलन हो रहे हैं| देश की राजधानी दिल्ली में विरोध प्रदर्शन का व्यापक असर है| यहाँ सार्वजानिक उपक्रमों को भारी क्षति पहुंचाई गई है| बसों को जलाया गया है| सड़कों पर परिवहन संचालन को कई बार रोका गया है| हिंसात्मक विरोध प्रदर्शन को देखते हुए संवेदनशील इलाकों में धारा 144 लगाई गई है| भीड़ भाड़, संवेदनशील तथा छात्रों से भरे इलाकों से जुड़े मेट्रो स्टेशन को एहतियातन कुछ समय या घंटों के लिए बंद कर दिया जा रहा है|

दिल्ली में शुक्रवार को जामा मस्जिद में नमाज के बाद मुसलामानों ने इस बिल के खिलाफ प्रदर्शन किया, जिसमें उनके साथ भीम आर्मी थी| दिल्ली की सुरक्षा व्यवस्था को नियंत्रण में रखने के लिए दिल्ली पुलिस प्रभावित क्षेत्रों में फ्लैग मार्च कर रही है|

दिल्ली के अलावा बिहार की राजधानी पटना, उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ, कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु तथा महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई, अहमदाबाद में इस कानून के खिलाफ व्यापक प्रदर्शन हो रहे हैं| पटना, लखनऊ में काफी हिंसक प्रदर्शन हुए हैं|  व्यापक हिंसा को देखते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने पूरे राज्य में धारा 144 लगा दी है| तथा उपद्रवियों से सख्ती से निपटने का आदेश दिया है|

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है की हिंसात्मक प्रदर्शन करने वाले और सार्वजनिक वस्तुओं को क्षति पहुंचाने वाले से सरकार सख्ती से निपटेगी | योगी आदित्यनाथ ने यह भी कहा है कि सार्वजनिक उपक्रमों को हुई क्षति की भरपाई उपद्रवियों की संपत्ति को नीलाम कर के किया जाएगा|

विरोध के देशव्यापी होने का कारण

देश की सभी मुख्य विपक्षी पार्टियाँ इस कानून के विरोध में हैं| इस कारण यह विरोध प्रदर्शन देशव्यापी होने के साथ साथ उग्र भी हो चुका है| तृणमूल कांग्रेस, लेफ्ट पार्टी, कांग्रेस, राजद, आप, सपा, बसपा  आदि मुख्य विपक्षी पार्टियाँ इस कानून के विरोध में हैं| ये पार्टियाँ एक प्रतिनिधिमंडल के रूप में राष्ट्रपति से मिलकर इस कानून को रद्द करने की मांग कर चुकी हैं|

देशभर में हज़ारों लोगों को हिंसात्मक प्रदर्शन के कारण गिरफ्तार किया गया है

क्या कहते हैं प्रधानमन्त्री ?

नागरिकता संशोधन अधिनियम पर हिंसक विरोध दुर्भाग्यपूर्ण और गहरा संकटपूर्ण है। बहस, चर्चा और असंतोष लोकतंत्र के आवश्यक अंग हैं, लेकिन कभी भी सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान नहीं पहुंचा है और सामान्य जीवन की अशांति हमारे लोकाचार का हिस्सा है। 

मैं अपने साथी भारतीयों को आश्वस्त करना चाहता हूं कि सीएए किसी भी धर्म के भारत के नागरिक को प्रभावित नहीं करता है। किसी भारतीय को इस अधिनियम के बारे में चिंता करने की कोई बात नहीं है। यह अधिनियम केवल उन लोगों के लिए है, जिन्हें बाहर उत्पीड़न का सामना करना पड़ा है और भारत को छोड़कर उनके पास जाने के लिए कोई अन्य जगह नहीं है।

क्या कहते हैं विपक्षी नेता ?

राहुल गाँधी- सीएबी एंड एनआरसी भारत पर फासीवादियों द्वारा फैलाए गए बड़े ध्रुवीकरण के हथियार हैं। इन गंदे हथियारों के खिलाफ सबसे अच्छा बचाव शांतिपूर्ण, अहिंसक सत्याग्रह है। मैं उन सभी के साथ एकजुटता से खड़ा हूं जो सीएबी और एनआरसी के खिलाफ शांति से विरोध कर रहे हैं।

ममता बनर्जी- नागरिकता संशोधन विधेयक देशहित में नहीं है और मेरे रहते यह बंगाल में लागू नहीं होगा|

अरविन्द केजरीवाल- मैं और मेरी नागरिकता संशोधन अधिनियम का विरोध करते हैं| यह धार्मिक आधार पर लोगों को बांटने वाला है| केंद्र सरकार को यह बिल वापस लेकर देश में व्याप्त गरीबी, महंगाई और बेरोजगारी जैसे समस्याओं के समाधान के लिए प्रयास करना चाहिए|

 

(पंकज कुमार, मीडिया दरबार)

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