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बड़े आर्थिक संकट की ओर बढ़ रही है दुनिया : आईएमएफ

आईएमएफ का दावा – दुनिया को 2009 से बड़े आर्थिक संकट से जुझना पड़ सकता है

कोरोना वायरस के कहर के कारण दुनिया के कई देशों में लॉकडाउन की स्थिति है जिसके कारण इन देशों में इंडस्ट्रीयल एक्टिवीटीस थम सी गई है। इंडस्ट्रीयल एक्टिवीटीस रुकने के कारण अर्थव्यवस्था को बड़ा झटका लगा है। आईएमएफ की मेनेजिंग डायरेक्टर (एमडी) क्रिस्टालिना जॉर्जीवा ने 23 मार्च (सोमवार) को दुनिया को आगह किया कि इस बार आर्थिक संकट अब तक का सबसे बड़ा संकट हो सकता है जिसके कारण कई देशों की अर्थव्यवस्था तबाह हो सकती है।

क्रिस्टालिना जॉर्जीवा ने कहा कि कोरोना वायरस महामारी के चलते वैश्विक अर्थव्यवस्था एक बड़े आर्थिक नुकसान का सामना कर रही है, जो कि साल 2009 के नुकसान से भी अधिक बड़ा हो सकता है। उन्होंने कहा कि इससे निपटने के लिए जल्द से जल्द बहुत बड़े और व्यापक कदम उठाने की जरूरत है।

आईएमएफ की एमडी ने कहा, ‘कोरोना वायरस महामारी से होने वाली मौतों का अनुमान लगाना अभी संभव नहीं है। यह बहुत बड़ी संख्या हो सकती है। लोगों की जान बचाने और अर्थव्यवस्था को होने वाले नुकसान को सीमित करने के लिए सभी देशों को साथ काम करने की जरूरत है।’

हालांकि, उभरते बाजारों और कम आय वाले देश बड़ी चुनौती का सामना कर रहे हैं और उन्हें अतिरिक्त वित्तीय मदद और कर्ज में राहत की आवश्यकता है। उन्होंने कहा, ‘इस संकट की शुरुआत से निवेशक उभरते बाजारों से 83 बिलियन डॉलर निकाल चुके हैं। यह रिकॉर्ड कैपिटल आउटफ्लो है।

आईएमएफ की एमडी ने बड़े स्तर पर आर्थिक संकट का सामना कर रहे कम आय वाले देशों को अधिक मदद मुहैया कराने के लिए एडवांस इकोनॉमिक्स की जरूरत बताई। साथ ही उन्होंने कहा कि आईएमएफ अपनी एक ट्रिलियन डॉलर की लेंडिंग कैपेसिटी के साथ ऋण देने के लिए तैयार है। आईएमएफ चीफ ने वित्त मंत्रियों को साल 2020 के आउटलुक के लिए चेताया है। उन्होंने कहा कि मंदी इतनी बुरी है, जितनी वैश्विक वित्तीय संकट के समय होती है।

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