धार्मिक

नवरात्र क्या है….

पृथ्वी द्वारा सूर्य की परिक्रमा के काल में एक साल की चार संधियाँ हैं। उनमें मार्च व सितंबर माह में पड़ने वाली गोल संधियों में साल के दो मुख्य नवरात्र पड़ते हैं। इस समय रोगाणु आक्रमण की सर्वाधिक संभावना होती है। ऋतु संधियों में अक्सर शारीरिक बीमारियाँ बढ़ती हैं, अत: उस समय स्वस्थ रहने के लिए, शरीर को शुध्द रखने के लिए और तनमन को निर्मल और पूर्णत: स्वस्थ रखने के लिए की जाने वाली प्रक्रिया का नाम ‘नवरात्र’ है।

नारी में नवदुर्गा–

कूर्मपुराण में धरती की स्त्री का पूरा जीवन आकाश में रहने वाली नवदुर्गा की मूर्ति मे स्पष्ट रूप से बताया गया है। जन्म ग्रहण करती हुई कन्या “शैलपुत्री”, कौमार्य अवस्था तक “ब्रह्मचारिणी” तथा विवाह से पूर्व तक चंद्रमा के समान निर्मल और पवित्र होने से “चंद्रघंटा” कहलाती है। नए जीव को जन्म देने हेतु गर्भधारण करने से “कूष्मांडा” और संतान को जन्म देने के बाद वही स्त्री “स्कंदमाता” के रूप में होती है। संयम और साधना को धारण करने वाली स्त्री “कात्यायनी” और पतिव्रता होने के कारण अपनी और पति की अकाल मृत्यु को भी जीत लेने से “कालरात्रि” कहलाती है। कालीपुराण के अनुसार सारे संसार का उपकार करने से “महागौरी” तथा धरती को छोड़कर स्वर्ग प्रयाण करने से पहले पूरे परिवार और सारे संसार को सिद्धि तथा सफलता का आशीर्वाद देती नारी “सिद्धिदात्री” के रूप में जानी जाती है।

शक्ति एक, रूप अनेक

हमें मानना होगा देवी किसी पत्थर की मूर्ति में नहीं, वह तो केवल नारी में विराजमान है।  देवी ही हमारेे घर में मां, पत्नी और बेटी के रूप में मौजूद है। हम घर में इन स्वरूपों का आदर करें और उनसे चरित्रवान् होने व शक्ति का आशीर्वाद मांगे।

25 मार्च से नवरात्रि आरंभ हो चुके है । यह नवरात्रि चैत्र महीने का बसंत नवरात्रि है। नवरात्रि के नौ दिन बहुत ही शुभ और मंगलकारी समय होता है। इन नौ दिनों में देवी दूर्गा के नौ रूपों की पूजा की जाती है। नवरात्रि के नौ दिनों में हर एक दिन का अलग महत्व होता है। जिसमें पूरी श्रद्धा के साथ माता की उपासना और पूजा आराधना होती है। नवरात्रि के पहले दिन से लेकर आखिरी दिन तक क्या प्रक्रिया अपनाएं आईये जानते हैं।

नवरात्रि के नौ दिनों में कैसी पूजा

– नवरात्रि का व्रत पूरे नौ दिनों तक रखा जाता है।

– नवरात्रि के पहले दिन प्रतिपदा तिथि पर घटस्थापना यानि घर पर कलश स्थापना होती है।

– नवरात्रि में पूरे नौ दिनों तक उपवास रखकर पूजा-पाठ किया जाता है।

– नवरात्रि में माता को हर दिन अलग-अलग भोग लगाया जाता है।

– नवरात्रि के अष्टमी और नवमी तिथि पर कन्या पूजन के साथ नवरात्रि का समापन होता है।

एक साल में आते हैं 4 नवरात्रि

साल में कुल चार नवरात्रि होते हैं- दो सामान्य नवरात्रि और दो गुप्त नवरात्रि। चैत्र और आश्विन माह का नवरात्रि और आषाढ़ और माघ के गुप्त नवरात्रि।  तांत्रिक सिद्धियों को प्राप्त करने के लिए गु्प्त नवरात्रि में मां की उपासना होती है जबकि गृहस्थ जीवन में सभी तरह की मनोकामना की पूर्ति के लिए चैत्र और शारदीय नवरात्रि को प्रमुख माना जाता है।

चैत्र नवरात्रि

चैत्र नवरात्रि के समय मौसम का बदलाव होता है। सर्दियां जाती है और गर्मी के मौसम का आगमन होता है। गर्मी के मौसम में बीमारियों का खतरा सबसे ज्यादा होता है। ऐसे में शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने के लिए व्रत रखा जाता है।

घटस्थापना विधि

नवरात्रि के पहले दिन प्रतिपदा तिथि पर शुभ मुहूर्त को ध्यान में रखकर घटस्थापना की जाती है। पूजा स्थल पर मिट्टी की वेदी बनाकर उसमें जौ बोएं और मिट्टी का कलश रखें। कलश के ऊपर रोली से ॐ और स्वास्तिक आदि लिख दें। आपको कोई भी मंत्र आता हो या नहीं आता हो इस बात की चिंता न करें। कलश स्थापन के समय अपने पूजागृह में पूर्व के कोण की तरफ अथवा घर के आँगन से पूर्वोत्तर भाग में पृथ्वी पर सात प्रकार के अनाज रखें। संभव हो तो नदी की रेत रखें फिर जौ भी डाले इसके उपरांत कलश में जल, गंगाजल, लौंग, इलायची,पान, सुपारी, रोली, मोली, चन्दन, अक्षत, हल्दी, रुपया पुष्पादि डालें।

नवरात्रि के 9 दिन और 9 देवियां

पहला दिन- प्रतिपदा- मां शैलपुत्री की उपासना

दूसरा दिन- द्वितीया- मां ब्रह्राचारिणी की उपासना

तीसरा दिन- तृतीया- मां चंद्रघंटा की उपासना

चौथा दिन-  चतुर्थी तिथि- मां कूष्मांडा की उपासना

पांचवा दिन- पंचमी तिथि- मां स्कंदमाता की उपासना

छठा दिन- षष्ठी तिथि- मां कात्यायनी की उपासना

सातवां दिन- सप्तमी तिथि- मां कालरात्रि की उपासना

आठवां दिन- अष्टमी तिथि- मां महागौरी की उपासना

नौवा दिन- नवमी तिथि- मां सिद्धिदात्री की उपासना

क्यों बोया जाता है नवरात्रि में जौ?

नवरात्रि में पूजा स्थल के पास जौ बोने की परंपरा होती है। इसके पीछे का कारण यह कि जौ को ब्रह्रा स्वरुप और पृथ्वी की पहली फसल जौ को माना गया है।

कन्या पूजन क्यों?

नवरात्रि पर 10 साल से छोटी कन्याओं का पूजन किया जाता है। ऐसी मान्यता है कि छोटी कन्याओं में मां का स्वरूप बसता है और यह ऊर्जा और शक्ति का प्रतीक मानी जाती हैं। इसलिए नवरात्रि पर कन्या पूजन का विशेष महत्व होता है।

नवरात्रि पर माता का आगमन और वाहन

हर नवरात्रि पर माता का आगमन अलग-अलग दिन के हिसाब से अलग-अलग सवारी पर होती है।

नवरात्रि का पहला दिन- रविवार या सोमवार- मां दुर्गा का हाथी की सवारी पर आगमन – शुभ

नवरात्रि का पहला दिन-  शनिवार और मंगलवार- मां दुर्गा का घोड़े की सवारी पर आगमन – अशुभ

नवरात्रि का पहला दिन-  गुरुवार और शुक्रवार- मां दुर्गा का पालकी की सवारी पर आगमन – अशुभ

नवरात्रि का पहला दिन- बुधवार- मां दुर्गा की नाव की सवारी पर आगमन – शुभ

नवरात्रि के 9 दिन और मंत्र

पहला दिन- ह्रीं शिवायै नम:।

दूसरा दिन- ह्रीं श्री अम्बिकायै नम:।

तीसरा दिन- ऐं श्रीं शक्तयै नम:।

चौथा दिन- ऐं ह्री देव्यै नम:।

पांचवां दिन- ह्रीं क्लीं स्वमिन्यै नम:।

छठा दिन- क्लीं श्री त्रिनेत्राय नम:।

सातवां दिन- क्लीं ऐं श्री कालिकायै नम:।

आठवां दिन- श्री क्लीं ह्रीं वरदायै नम:।

नौवां दिन- ह्रीं क्लीं ऐं सिद्धये नम:।

 

नवरात्रि के 9 दिन और मां दुर्गा को भोग

पहला दिन- गाय का घी

दूसरा दिन- चीनी, मिश्री

तीसरा दिन- दूध और मिठाई

चौथा दिन- मालपुआ

पांचवां दिन- केला

छठा दिन- शहद

सातवां दिन- गुड़

आठवां दिन- नारियल

नौवां दिन- तिल

चैत्र नवरात्रि और घट स्थापना शुभ मुहूर्त 2020

25 मार्च, बुधवार

सुबह 6 बजकर 19 मिनट से 7 बजकर 17 मिनट तक

 

चैत्र नवरात्र तिथि |

पहला नवरात्र, प्रथमा तिथि, 25 मार्च 2020, दिन बुधवार

दूसरा नवरात्र, द्वितीया तिथि  26 मार्च 2020, दिन बृहस्पतिवार

तीसरा नवरात्रा, तृतीया तिथि, 27 मार्च 2020, दिन शुक्रवार

चौथा नवरात्र, चतुर्थी तिथि, 28 मार्च 2020, दिन शनिवार

पांचवां नवरात्र , पंचमी तिथि , 29 मार्च 2020, दिन रविवार

छठा नवरात्रा, षष्ठी तिथि, 30 मार्च 2020, दिन सोमवार

सातवां नवरात्र, सप्तमी तिथि , 31 मार्च 2020, दिन मंगलवार

आठवां नवरात्रा , अष्टमी तिथि, 1 अप्रैल 2020, दिन बुधवार

नौवां नवरात्र नवमी तिथि 2 , 2020 दिन बृहस्पतिवार

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