राष्ट्रीय

महामारी के बीच डॉक्टर्स डे क्यों है ख़ास?

जहा एक और देश और विश्व कोरोना कि लड़ाई लड़ रहे है इसमें हमारे जो कोरोना वारियर्स है उसमे डॉक्टर और पेरामेडिकल सबसे प्रमुख है जिस वजह से इस साल का डॉक्टर्स डे ख़ास हो गया है क्यूंकि इस कोरोना काल में डॉक्टर्स ने सबसे आगे रह के कोरोना को कंट्रोल किया है बिना अपनी जान कि परवाह किये देश सेवा में लगे है. इस लिए भारत सरकार ने भूतकाल में भी कोरोना वारियर्स के सम्मान में एयरफोर्स कि मदद से फूल बरसा के हमारे कोरोना वारियर्स का सम्मान किया. भारत में हर वर्ष डॉक्टर्स डे 1 जुलाई को मनाया जाता है,डॉक्टर्स डे भारत के महान चिक्त्सिक स्वर्गीय श्री डॉक्टर बिधन चन्द्र रॉय,जो की बंगाल के मुख्यमंत्री भी रह चुके है. जिनका जन्म 1 जुलाई 1882 को हुआ उनके सम्मान में डॉक्टर्स डे का आयोजन होता है. पीएम ने अपने ट्वीट में कहा कि भारत कोविड-19 के खिलाफ जंग में फ्रंटलाइन में खड़े होकर लड़ रहे हमारे डॉक्टरों को सलाम करता है. पीएम ने इसके साथ कोरोना के खिलाफ लड़ाई में जुटे डॉक्टरों का एक वीडियो भी शेयर किया है.

बता दें कि इसके पहले अप्रैल में पीएम मोदी ने कोरोना के खिलाफ लड़ाई में लगे हुए मेडिकल स्टाफ और जरूरी सेवाओं से जुड़े लोगों को कोरोना वॉरियर्स का नाम दिया था. उन्होंने उनके प्रति देश की कृतज्ञता दिखाने के लिए आह्वान किया था कि सभी लोग अपने घरों की बालकनी और छतों से थाली, घंटी या ऐसी ही कोई चीज बजाकर उनके प्रति आभार जताएं. इस आह्वान पर देशभर में लोगों ने इस तरह कोरोना वॉरियर्स की हौसला अफजाई की थी, जिसे कोरोना वॉरियर्स को समर्पित बताया गया था.

कैसे हुई नेशनल डॉक्टर डे मनाने की शुरुआत-  

भारत में इसकी शुरुआत 1991 में तत्कालिक सरकार द्वारा की गई थी। तब से हर साल 1 जुलाई को नेशनल डॉक्टर्स डे मनाया जाता है। यह दिन भारत के महान चिकित्सक और पश्चिम बंगाल के दूसरे मुख्यमंत्री को सम्मान और श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए मनाया जाता है।

दिल्ली के मुख्यमंत्री श्री अरविन्द केजरीवाल ने ट्वीट कर कहा की हमारे डॉक्टरों की वीर सेवा, बलिदान पीढ़ियों को प्रेरित करेगी, हमारे डॉक्टर इस सदी कि सबसे मुश्किल लड़ाई लड़ रहे इनके बलिदानों को हम सब हमेशा याद रखेंगे.

इसके अलावा, डॉक्टर्स डे पर मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस के नेता राहुल गांधी भी बुधवार को देश में कोरोना से जंग में लगी हुई नर्सों से बातचीत करने वाले हैं. वो इस दौरान उनके अनुभव और समस्याओं पर बातचीत करेंगे.

हमने देखा कि देश में जब तालाबंदी के शुरूआती दिन थे तो अलग अलग आस्था और अफवाओ कि वजह से हमारे कोरोना वारियर्स के ऊपर कई तरह के आक्रमण भी हुए,जिसके वजह से हमारे कोरोना वारियर्स का मनोबल भी टुटा. आप सभी देश वासियों को यह ध्यान रखना होगा की हमारे डॉक्टर्स हमें एक बेहतर कल देने के लिए निरंतर प्रयासरत है. इस लिए कोरोना काल में उनका सम्मान करे और उनके सुझाये उपचार और दिशा-निर्देशों का पालन करे तभी भारत इस सदी कि सबसे बड़ी महामारी से जंग जीत पायेगा.

राकेश मोहन सिंह – मीडिया दरबार

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