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शाह फैसल ने लिया अब यह यू-टर्न…….

जम्मू-कश्मीर में आईएएस ऑफिसर की नौकरी को छोड़ राजनेता बने शाह फैसल अब नया यू-टर्न लेते हुए नजर आ रहे हैं। इस यू-टर्न की चर्चा उनके और देश के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल के बीच हुई बात चीत के बाद काफी बढ़ गई है। शाह फैसल, 2010 की सिविल सेवा परीक्षा के टॉपर हैं। वो जम्मू-कश्मीर राज्य सरकार की सेवा बतौर आईएएस अधिकारी भी कर चुके हैं। साल 2019 के जनवरी महिने में उन्होने अपनी सरकारी नौकरी छोड़ दी थी। इसके पीछे का कारण देते हुए उन्होंने कहा था कि वो कश्मीर में “नायाब हत्याओं” और भारतीय मुस्लमानों के “हाशिएकरण” के खिलाफ अवाज को उठाने के लिए अपनी राजनीतिक पार्टी बनाएंगे। इसके लिए उन्होंने अपनी खुद की पार्टी जम्मू और कश्मीर पीपुल्स मूवमेंट का गठन किया।

अगस्त 2019 में जब केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 और 35 ए को हटाया तो केंद्र के इस कदम के खिलाफ सबसे मुखर आलोचकों में से एक नाम शाह फैसल का भी था। इसके बाद उन्हे भी  सैकड़ों अन्य राजनीतिक नेताओं के साथ सुरक्षा कारणों से हिरासत में लेकर नज़रबंद कर दिया गया था।

अजीत डोभाल से मुलाकात को लेकर प्रश्न पर बोलें शाह फैसल

सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल से खुद की मुलाकात को लेकर शाह फैसल ने कोई भी जानकारी ना देते हुए कहा कि वो आईएएस के सदस्य रह चुके हैं और इसमें उनके लिए कुछ अलग नहीं है अगर वो सरकार के कुछ लोगों से मिल रहे हैं तो। इस बयान के साथ यह ही अब यह भी अड़चने लगाई जाने लगी हैं कि वो एक बार फिर से राज्य में आईएएस की पोस्ट पर वापिसी कर चार्ज ले सकते हैं। इसके पीछे की अहम वजह केंद्र सरकार द्वारा अब तक उनका दिया हुआ इस्तिफा स्वीकार ना करने का कारण शामिल है।

जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटने के बाद केंद्र सरकार पर किए थे हमले:-

5 अगस्त को कश्मीर के विशेष अधिकार छीने जाने के बाद केंद्र सरकार पर हमला करते हुए शाह फैसल ने कहा था कि “कश्मीर में राजनीतिक अधिकारों की बहाली के लिए एक लंबे निरंतर अहिंसक राजनीतिक जन आंदोलन की आवश्यकता होगी। अनुच्छेद 370 के खत्म होने के साथ मुख्यधारा को भी खत्म कर दिया गया है अब आप या तो एक कठपुतली हो सकते हैं या फिर एक अलगाववादी। मिले-जुले रंग के नहीं।”

शाह फैसल ने लिया अब यह यू-टर्न

अनुच्छेद 370 को लेकर शाह अब बदली-बदली बोली बोलना शुरू कर चुके हैं। उन्होंने एक ट्वीट कर लिखा कि ‘मुझे लगता है कि हमें यह समझने की जरूरत है कि 1949 में राष्ट्रीय सहमति अनुच्छेद 370 को शामिल करने के बारे में थी और 2019 की राष्ट्रीय सहमति इसे खत्म करने के बारे में थी। हमें राष्ट्र की मनोदशा को समझना होगा और वास्तविकता के साथ आना होगा।‘  इस तरह का बयान उनके द्वारा पहले दिए गए सभी बयानों के उपर ये नए बयान यू-टर्न शाबित हो रहे हैं। आपकी जानकारी के लिए आप को बता दें कि कश्मीर के मुद्दों को लेकर सरकार की कड़ी आलोचना करने वाले शाह फैसल अब खुद की पार्टी के अध्यक्ष पद से भी इस्तीफा दे चुके हैं।

शाह फैसल को लेकर अब उठा रहे हैं ये सवाल

शाह फैसल जिन्होंने आईएएस के पद से इस्तीफा ही कश्मीर में फैले आतंकवाद, बढ़ती बेरोजगारी और कश्मीर के दमन को रोकने को लेकर एक लम्बे संधर्ष की बात करके कही थी। लेकिन अब उनके इस तरह के बयानों और यू-टर्न वाले प्रयासों को देखते हुए सवाल यह उठता है कि क्या जिस कश्मीर का ख्वाब उन्होंने देखा था वो सच होने के कागार पर है? क्या अब कश्मीर का भविष्य खतरे में नहीं है?  या फिर इसके पीछे शाह फैसल की कोई मजबूरी है। इन सभी सवालों का जवाब अब सिर्फ शाह फैसल और अजीत डोभाल के बीच हुई बात चीत के सामने आने से ही पता लग सकता है।

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