राजनीति

5 राज्यों में नए चुनावी समीकरण के आसार !! BJP या कांग्रेस कौन हैं कमज़ोर ?

5 राज्यों में नए चुनावी समीकरण के आसार !!

BJP या कांग्रेस कौन हैं कमज़ोर ?

5 राज्यों

देश के 5 राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए लगभग सभी राजनीतिक पार्टियों ने ऐड़ी चोटी का बल लगा दिया है। कल यानी 6 अप्रैल को असम की 40 विधानसभा सीटों पर चुनाव होने है। असम के साथ साथ तीन अन्य राज्यों में भी चुनाव होना है, जिसमें तमिलनाडु, केरल, पुडुचेरी शामिल है। वहीं बंगाल में पांच चरणों के मतदान अभी बाकी है। लेकिन 6 अप्रैल को होने वाले मतदान के बाद इन 4 राज्यों में क्या है चुनावी समीकरण इसी पर हम करेंगे चर्चा –

पुडुचेरी में भाजपा के आने के संकेत

सबसे पहले बात करें पुडुचेरी की तो वहाँ इस बार भाजपा के लिए अच्छे संकेत आने की आशा की जा रही है, इस बार भाजपा और उसके गठबंधन ने सुब्रमण्यम भारती और वेट्री वेल यानी भगवान कार्तिके के भाले को चुनावों में बढ़त बनाने के लिए प्रयोग किया जा रहा है। यहां साफ तौर पर धार्मिक एंगल देखा जा सकता है।

तो वहीं दूसरी कांग्रेस में बहुत उथल पुथल मची है, यहां के बड़े बड़े नेताओं ने भाजपा का हाथ थाम लिया है। कांग्रेस औऱ डीएमके के बीच आए मनमोटाव के बाद कांग्रेस बहुत ही फिकी नज़र आ रही है। पुडुचेरी में होने वाले चुनाव प्रचार में भी कांग्रेस द्वारा किए गए प्रचार बहुत मंद नज़र आ रहें है।

केरल में UDF और LDF के बीच कड़ा मुकाबला

केरल की बात करें तो केरल की पहचान भारत में पढ़े-लिखे प्रगतिशील राज्य के रूप में है। इसलिए राजनीतिक पार्टियों की धारणा रही है कि धार्मिक भावना को उभारने वाली बातों का असर यहां के मतदाताओं पर नहीं होता है, इसलिए वे इसे उठाने से परहेज करती रही हैं।

परंतु भारतीय जनता पार्टी की जमीनी राजनीतिक हकीकतों की पहचान करने की क्षमता अन्य राजनीतिक पार्टियों के मुकाबले कहीं बेहतर है। जहां दूसरी पार्टियां हिचक जाती हैं, वहां भाजपा बेखौफ होकर आक्रामक तेवर अपनाती रही है। लेकिन इसके बावजूद केरल में UDF और LDF के बीच कड़ा मुकाबला माना जा रहा है, क्योकिं पिछले एक दशक से यहां यह परंपरा चली है कि दोनो दल के बीच मे सत्ता का हस्तांतरण हो ही जाता है। इसलिए इस बार कुछ दिलचस्प होने की ही संभावना मानी जा रही है।

तमिलनाडु चुनाव में जातीय मुद्दें हावी

अब बात करते है तमिलनाडु की , तमिलनाडु में इस बार विधानसभा के लिए हो रहे चुनाव में में जातीय मुद्दें काफी हावी दिख रहे हैं। राजनीतिक पार्टियों का सारा गणित ज्यादा से ज्यादा जातियों को अपने पाले में लाने पर टिका हुआ है। वहां पर ऐसा मानकर चला जा रहा है कि जो पार्टी अपने साथ जातीय समीकरणों को बेहतर तरीके से बैठा लेगी, सत्ता तक पहुंचने का उसका रास्ता आसान हो जाएगा।

यहां बीजेपी के बाद अब डीएमके ने भी थेवर और नाडार (हिंदू) पर अपनी पकड़ बनाने के लिए नए सिरे से प्रयास शुरू कर दिए हैं। डीएमके को पता है कि ब्राह्मण ने हमेशा एआईएडीएमके को वोट दिया है। पूर्व मुख्यमंत्री एमजीआर और जय ललिता से ब्राह्मण का हमेशा लगाव रहा है। ऐसे में उसने अब दूसरी जातियों को अपनी तरफ खींचने की रणनीति पर काम किया है।

अब बात असम की तो इस बार असम में पांच साल से सत्ता में रही यह पार्टी कांग्रेस के नेतृत्व में बने गठबंधन से मिलने वाली कड़ी चुनौतियों के बीच अपनी सरकार बचाने के लिए मैदान में है। बंगाल में उसका मुकाबला सत्तारूढ़ टीएमसी से है तो असम में विपक्षी कांग्रेस गठबंधन से.

असम के चुनावी नतीजों का पूर्वोत्तर की राजनीति पर गहरा असर होने की संभावना है। असम में इस बार भाजपा को चुनौती देने वाली पार्टी में AIUDF और कांग्रेस खड़ी है लेकिन पलड़ा इस बार भी भाजपा का ही भारी नज़र आ रहा है, असम में इस बार चुनावी मुद्दों की बात करें तो इस बार चाय बागान मजदूरों और हर साल आने वाली बाढ़ बड़ा मुद्दा बनी हुई है।

रिपोर्ट- रुचि पाण्डें, मीडिया दरबार

 

 

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