धार्मिक

भारत के वो चमत्कारी मंदिर, जिसके चमत्कार को विज्ञान भी समझ नहीं पाया है।

रिपोर्ट-रुचि पाण्डें, मीडिया दरबार

भारत के वो चमत्कारी मंदिर, जिसके चमत्कार को विज्ञान भी समझ नहीं पाया है।

भारत में लाखों की संख्या में मंदिर हैं। भारत में स्थित सभी मंदिरों की अपनी ही एक अलग मान्यता है। हर मंदिर से जुड़ी अपनी अलग-अलग पौराणिक कथा व मान्यता है और बहुत से मंदिर अपने चमत्कार के कारण प्रसिद्ध हैं इन चमत्कारों का रहस्य आज तक विज्ञान भी जान नहीं पाया है। चलिए जानते हैं भारत के पांच रहस्यमय मंदिर के चमत्कारों के बारे में….

पहला मंदिर है तिरुमाला मंदिर है। यह मंदिर आंध्रप्रदेश के तिरुमाला में स्थित हैं। तिरूपति बालाजी को भगवान का एख नाम वैंकटेश और गोविंदा भी है। इस मंदिर की उत्पत्ति वैष्णव संप्रदाय ने की थी। मंदिर को लेकर कहा जाता है कि इस मंदिर में मूर्ति के ऊपर जो बाल है वो असली है। अगर मंदिर में मूर्ति पर कान लगाकर सुनो तो समुंद्र की लहरे सुनाई देती है। और यही कारण है कि इस मूर्ति पर हमेशा नमी बनी रहती है।

दूसरा मंदिर है, काल भैरव मंदिर- यह मंदिर मध्यप्रदेश के उज्जैन में क्षिप्रा नदी के किनारे है। मंदिर में भक्त तरह- तरह के प्रसाद चढ़ाते है। इस मंदिर की विशेषता यह है कि एस मंदिर में प्रसाद में मदिरायानी शराब चढ़ाई जाती है। इस मंदिर की खास बात यह है कि जैसे मंदिर के ऊपर प्याला लगाओं प्याला खाली हो जाता है। विज्ञान भी इश चमत्कार के आगे अपने घुटने टेक देता है। भगवान कालभैरव को उज्जैन का सेनापति माना जाता हैं।

तीसरा मंदिर है, मैहर वाली माता का मंदिर यह मंदिर मध्यप्रदेश के जबलपुर जिले में स्थित हैं. जब पुजारी जी शाम के समय आरती के बाद मंदिर के कपाट बंद कर नीचे आ जाते हैं तब भी मंदिर के अंदर से घंटी और पूजा की आवाज आती हैं. ऐसी मान्यता है की माता के भक्त आल्हा अभी भी यहाँ पूजा करने आते है. कई बार लोगो द्वारा इस रहस्य को जानने की कोशिश की गई लेकिन सिर्फ असफलता ही लोगो के हाथ आई हैं.

चौथा मंदिर हैं ज्वाला माता मंदिर, हिमाचल प्रदेश का कांगड़ा जिले में स्थित है। माना जाता है कि एस मंदिर में अनंत काल तक ज्वाला जल रही है। यह मंदिर 51 शक्तिपीठों मे से है। इसी स्थान पर माता सती की जीभ गिरी थी, और वह तब से शक्तिपीठों में गिना जाता है। मंदिर के आंगन में गोरखा डिब्बी नाम की जगह है, जो कि एक जल कुंड हैं, जिसमें हमेशा गर्म खोलता हुआ पानी हैं, जबकि कुंड का पानी ठंडा रहता है।

पांचवा मंदिर है कामाख्या मंदिर, यह पूर्वोत्तर भारत गुवाहाटी में स्थित है। यह 52 शक्तिपीठों में से एक हैं। इस मंदिर को लेकर मान्यता है, कि माता सती ने देह त्याग किया , तब भगवान शिव ने माता सती के शरीर को लेकर भटक रहें थे। तब देवी की योनी यहां गिर गई थी।  मान्यता है कि यहां मांगी गई सभी मुरादें फौरन पूरी हो जाती है।

 

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