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भूकंप से एक बार फिर हिली Delhi, क्या कोई बड़ा खतरा मंडरा रहा

Natural Disaster in India
Natural Disaster in India

दिल्ली में कल बुधवार की रात को 10 बजके 42 मिनट पर एक बार फिर Earthquake के हल्के झटके महसूस किए गए। इसकी रिएक्टर स्केल पर तीव्रता 3.2 मापी गई। भूकंप का केंद्र उत्तर प्रदेश के नोएडा से दक्षिण-पूर्व में 19 किलोमीटर दूर गौतमबुद्ध नगर में स्थित था। जो जमीन से लगभग 4 किलोमीटर नीचे था। इन झटकों का असर Delhi, नोएडा और फरीदाबाद तक रहा। वहीं भूकंप/Earthquake के झटके के बाद लोग घबरा गए और अपने-अपने घरों से कुछ समय के लिए बाहर निकल आए। इन भूकंप के झटकों से Delhi NCR के लोग दहशत में जी रहे है।

आपको यह जानकर हैरत होगी कि Delhi और आस-पास के क्षेत्र में यह पिछले 55 दिनों के भीतर 12वां भूकंप का झटका था। हालांकि सभी भूकंप की तीव्रता हल्की थी, जिससे किसी भी झटके से किसी भी प्रकार का जान-माल का नुकसान नहीं हुआ। इससे पहले 29 मई को भूकंप के झटके महसूस किए गए थे, जिसकी रिएक्टर स्केल पर तीव्रता 4.5 थी और इसका केंद्र दिल्ली से लगभग 65 किलोमीटर दूर हरियाणा के रोहतक में धरती से 5 किलोमीटर गहराई में था।

हालांकि Delhi NCR में लगातार आ रहे भूकंप के झटकों के पीछे भू-वैज्ञानिकों का कहना है कि यह किसी बड़े भूकंप की चेतावनी भी हो सकती है। समूचे उत्तर भारत, और खासतौर से यह देश की राजधानी दिल्लीवासियों के लिए एक बड़ी चिंता का विषय है।

वैज्ञानिकों के मुताबिक, भौगोलिक आधार पर देखें तो Delhi सेस्मिक zone-4 में शामिल है।

बता दें कि सेस्मिक zone-4 तबाही के मामले में दूसरें नंबर पर आता है, जिस लिहाज से यहां पर 7 से लेकर 8 तक की तीव्रता वाले भूकंप आने की संभावना हमेशा बनी रहती है।

zone-4 से होकर गुजरने वाली भूकंपीय फॉल्ट लाइन में आने वाले किसी भी बड़े भूगर्भीय खतरे का कारण बन सकती है। बीते मई में जो भूकंप दिल्ली में आए उनका केंद्र नई दिल्ली के उत्तर में था। बार-बार इस तरह कांप रही धरती लगातार बड़े भूकंप की ओर इशारा कर रही है। दिल्ली में चिंता इसलिए भी अधिक है कि राष्ट्रीय राजधानी होने के साथ-साथ ही कई इलाके बेहद ही घनी आबादी वाले है।

हालांकि कुछ भू-वैज्ञानिकों का कहना कि लगातार आ रहे इन भूकंपों में सभी बेहद कम तीव्रता वाले के थे। इनमें केवल दो या तीन ही ऐसे थे जिनकी तीव्रता 5 के आसपास रही। उनका साफतौर पर कहना है इन झटकों से डरने की जरूरत नहीं है। लेकिन हम इसकी गंभीरता को कम ना समझें क्योंकि ये करना बेहद लापरवाही का सबब बन सकता हैं। इसका उदाहरण है गुजरात के भुज में आए भूकंप के दौरान ऐसा देखा गया था कि वहां पर तेज भूकंप आने से पहले कुछ हल्के झटके महसूस किए गए थे। नेशनल सेंटर फॉर सेस्‍मोलॉजी के वैज्ञानिकों ने दूसरे विशेषज्ञों से भी इस बारे में राय जानी है और यही नतीजा निकला है कि लगातार आने वाले कम तीव्रता के भूकंप से डरने की जरूरत नहीं है।

सोशल मीडिया जैसे कि फेसबुक, इंस्टाग्राम, व्हाट्सएप वगैरह पर लोग इस गंभीर मसले पर भी व्यंग्य भरे मैसेज आदान-प्रदान कर रहे हैं, कि धरती पर कोरोना, आसमान में टिड्डियां और समुद्री साइक्लोन और धरती के नीच से भूकंप, भगवान आप क्या करके मानोगे। यह तो थी व्यंग्य की बात, लेकिन निसंदेह हम भारतवासियों के लिए यह काल बहुत ही पीड़ादायक है। मीडिया दरबार आपको यह संदेश देना चाहता है कि प्रकृतिक आपदाओं से भरे हुए इस समय में आप अपना, अपने परिजनों का विशेष ध्यान रखें और देखते रहें मीडिया दरबार।

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