विचार

EVM को लेकर फिर छिड़ा विवाद चुनाव आयोग ने सुनाई ये कहानी !

असम और पश्चिम बंगाल में मतदान के दौरान फिर से घिरी EVM

देश के 5 राज्यों में विधानसभा के चुनाव कराये जा रहे हैं जहा पश्चिम बंगाल और असम में मतदान के 2 चरण पूरे हो चुके हैं तो वही अन्य 3 राज्यों तमिलनाडु, केरल और पंदुचेरी में 6 अप्रेल को चुनाव होने हैं जो महज़ एक चरण में कराये जाने है|

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वही पश्चिम बंगाल में अभी मतदान के 6 चरण बाकी हैं और असम में मतदान के 2 चरण के बाद अब महज़ एक और चरण के मतदान बाकी हैं जो 6 अप्रेल को कराये जाने हैं|

लेकिन जैसा कि हमारे देश में चुनावों का रिवाज़ रहा हैं कि कोई कुछ भी कर ले ये कभी शन्ति और लोकतान्त्रिक तरीके से सम्पन्न हो ही नहीं सकते, तो बस इसी रिवाज़ का पालन करते हुए इस बार भी मतदान में गड़बड़ी के मामले सामने आये और हर बार बार कि तरह इस बार भी बिचारी EVM पर सारे दोष मढने कि परंपरा को आगे बढाया गया|

असम में EVM के साथ छेड़ छाड़ का मामला आया सामने

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नहीं नहीं अगर आप सोच रहे हैं कि जब सब कुछ पहले जैसा ही हैं तो इस कहानी में मज़ा ही क्या हैं तो ये कहानी इतनी भी बोरिंग नहीं हैं इस बार राजनीतिक पार्टियों के अलावा इलेक्शन कामिशन भी मैंन रोल में हैं|

और उसका किरदार इस बार बेहद सस्पीसियस और कांफुसिंग हैं मतलब ऐसा समझिये कि अगर आपको थ्रिल और सस्पेंस से भरी कहानिया पसंद हैं तो ये स्टोरी आपको बेहद पसंद आने वाली हैं|

तो कहानी कुछ ऐसे शुरू होती हैं कि असम विधानसभा चुनाव में मतदान का दूसरा चरण जारी हैं इसी बीच शाम को 6 बजे मतदान ख़त्म होने के बाद असम के रतबाड़ी विधानसभा सीट के मतदान केंद्र संख्या 149 का पर चुनाव आयोग के तैनात अधिकारी बूथ में लगी EVM मशीनों को समेटने लगे|

EVM मशीनों को बक्से में भर कर उसपर ताला लगाया गया चुनाव आयोग कि सील लगाई गई और इसे लेकर चुनाव आयोग के अधिकारी उन्हें चुनाव आयोग कि तरफ से उन्हें अलोटेड गाडी में जाने के लिए बैठ गए|

चुनाव आयोग कि सफाई पर बन सकती हैं कहानी

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यहाँ तक सब ठीक ही चल रहा था कि तभी अचानक ख़राब मौसम और तेज़ बारिश के कारण उनकी गाडी खराब हो गई मौके पर मौजूद अफसरों ने दूसरी गाड़ी मांगने के लिए फ़ोन किया लेकिन उसमे देरी हो रही थी|

तभी, गुप अँधेरे में उन्हें दूर से आती रौशनी दिखी ये रौशनी थी, एक सफ़ेद बुलेरो कि, AS10 B 0022 नंबर प्लेट कि इस बोलेरो को देख कर चुनाव आयोग के अधिकारीयों को ख्याल आया कि क्यों न इस बुलेरों से लिफ्ट ले कर जल्द से जल्द उनके पास मौजूद इन कीमती वोटों यानी EVM मशीनों को तय समय पर करीमपुर के स्ट्रोंग रूम तक पंहुचा दिया जाए?

AS10 B 0022 नंबर प्लेट वाली इस बुलेरों में बैठा ड्राईवर भी उनकी मदद को तुरंत तैयार हो गया और बस जल्दी से सारे EVMs को इस वाइट बुलेरों में शिफ्ट किया गया सभी अधिकारी भी उसकी सुरक्षा के लिए उसमे बैठ गए|

बुलेरो स्टार्ट हो गई थोड़ी देर चली और करीमगंज इलाके के निमल बाज़ार में जा पहंची जहा पहुचने के बाद रात के लगभग 7:30 बजे कुछ लोगो ने इस गाडी पर गौर किया तो उन्होंने देखा कि एक बुलेरों जिस पर बीजेपी विधायक का स्टीकर लगा हैं वो सील बंद EVM मशीने लेकर जा रही हैं|

बीजेपी विधायक कि गाड़ी में मिली EVM मशीने

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बस, लोगों ने गाडी रुकवाई कुछ पूंछताछ करते तबतक बुलेरों का मददगार भाग निकला और गाडी में बच गए अधिकारी और EVM कि सील कि हुई मशीने आस पास के लोगो को जैसे ही इसका पता चला मौके पर भीड़ इक्कठी हो गई लोगों का गुस्सा फूट पड़ा और मामला देखते ही देखते हाथापाई में तब्दील हो गया मामले को हाँथ से निकलता देख पुलिस ने भी हल्का बल प्रयोग किया जिसमे 2 लोग भी गहयल हो गए|

जब गाडी पे लगे स्कीटर को देखा गया तो पता चला कि ये बुलेरों बीजेपी के विधायक कृष्णेंदु पाल कि हैं जो इस बार असम चुनाव में पत्थरकांडी से भाजपा विधायक हैं|

और उनकी उस सफ़ेद गाडी पर इसे दर्शाता उनका पोस्टर भी लगा था लेकिन गलती से शायद चुनाव आयोग कि नज़र इस पर नहीं पड़ी और उन्होंने इस गाडी के ड्राईवर से लिफ्ट ले ली|

EVM कि गड़बड़ी के बाद फिर से कराये जाएँगे चुनाव

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तो कहानी तो हमारी यहाँ ख़त्म होती हैं लेकिन अब बात सस्पेंसस कि तो इस कहानी के डायरेक्टर यानी हमारे चुनाव आयोग से कोई पूछे कि उन्हें अधिकारी क्या अपनी ड्यूटी और रूल्स और रेगुलेशन का पाठ पढ़ कर भर्ती नहीं हुए थे जो उन्हें ये भी समझ नहीं आया कि वो ऐसे कैसे किसी भी गाडी में लिफ्ट लेकर बैठ गए|

दूसरा सवाल अगर लिफ्ट लिया था तो क्या उन्हें उस गाडी पर लगा बीजेपी विधायक का स्टीकर नहीं दिखा और सबसे बड़ा सवाल कि पकडे जाने पर उस बुलेरों का मददगार ड्राईवर मौके से फरार क्यों हो गया|

EVM मशीनों कि जानकारी के बाद प्रियांका गाँधी ने ट्वीट करते हुए लिखा –

क्या स्क्रिप्ट है?

चुनाव आयोग की गाड़ी खराब हुई, तभी वहां एक गाड़ी प्रकट हुई। गाड़ी भाजपा के प्रत्याशी की निकली। मासूम चुनाव आयोग उसमें बैठ कर सवारी करता रहा। प्रिय EC, माजरा क्या है? आप देश को इस पर कुछ सफाई दे सकते हैं? या हम सब मिलकर बोलें EC की निष्पक्षता को वनक्कम?

राहुल गाँधी ने ट्वीट कर लिखा –

EC की गाड़ी ख़राब, भाजपा की नीयत ख़राब, लोकतंत्र की हालत ख़राब!

हलाकि हालांकि चुनाव आयोग का कहना हैं कि EVM कि मशीने सील थी लेकिन क्योंकि इस मामले ने काफी तूल पकड़ लिया था इसलिए चुनाव आयोग को मजबूरन सफाई देनी पड़ी और क्योंकि सफाई के लिए कुछ नहीं था तो ये कहानी सुना दी|

अब चुनाव आयोग कि  ओर से जारी इस सफाई के बाद यही सवाल विपक्ष भी लगातार उससे पूछ रही हैं इसके जवाब में चुनाव आयोग ने असम के रतबाड़ी बूथ सख्या 149 पर दुबारा से मतदान करने का ऐलान किया हैं साथ ही इस मामले से जुड़े चार अधिकारीयों को ससपेंड कर दिया हैं मामले कि FIR भी दर्ज हो गई है अब इसकी कारवाही अपनी गति से चलती रहेगी और इस कार्यवाही के नतीजे सामने आने से पहले चुनाव के नतीजे आपके सामने होंगे|

और उसके बाद कार्यवाही का क भी किसी को याद नहीं रहेगा खैर यहाँ जिस बात कि चिंता करने कि जरुरत हैं वो ये कि सरकारे जो करे सो करे लेकिन जब हमारी लोकतान्त्रिक संस्थाए इस तरह कि लापरवाही और गैरजिम्मेदाराना हरकत पर उतर आती हैं तो इसका खामियाजा सीधा सीधा देश कि आम जनता को चुकाना पड़ता हैं|

EVM के साथ इतनी बड़ी लापरवाही कैसे कर सकती हैं लोकतान्त्रिक संस्थाये

आपके कीमती वोट जब इस तरह किसी कि निजी सम्पति बन जाते हैं, तो समझ लीजिये अब देश में लोकतंत्र नाममात्र का रह गया हैं| और ये आपके लिए पूरे देश के लिए एक तरह कि चेतावनी हैं कि आप बस वोट देकर अपने कर्ताव्यों से मुक्त नहीं हो सकते आपको अब हर गलत बात पर अपनी आवाज उठाने कि जरुरत हैं|

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लेकिन यहाँ साथ ही ये भी ध्यान रखने कि जरुरत हैं कि सिर्फ ख़ामोशी को ख़त्म खरने के लिए अगर आप आवाज उठाते हैं तो ऐसी आवाज से आपकी ख़ामोशी कही बेहतर हैं आवाज तब उठाइए जब आपके पास आपकी ख़ामोशी से बढ़कर कुछ हो इसपर विचार कीजियेगा ?

रिपोर्ट-पूजा पाण्डेय 

मीडिया दरबार 

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