अंतर्राष्ट्रीय

चीन को पछाड़, संयुक्त राष्ट्र में भारत बना ECOSOC का सदस्य

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Photo Source: Astra RS

रिपोर्ट: रुचि पाण्डें – मीडिया दरबार

भारत ने चीन को हाल ही में एक बड़ा झटका दिया है। चीन को पछाड़ते हुए भारत आर्थिक और सामाजिक परिषद (ECOSOC) की संस्था यूनाइटेड नेशन के कमीशन ऑन स्टेटस ऑफ वूमेन का सदस्य बन गया है। ECOSOC में भारत के स्थायी प्रतिनिधि टीएस तिरुमूर्ति ने ट्विटर के जरिए इसकी जानकारी दी है। भारत चार सालों के लिए ECOSOC का सदस्य रहेगा। भारत को यह सदस्यता 2021 से लेकर 2025 तक रहेगी।

ECOSOC का सदस्य बनने से भारत को लाभ

यूएन में भारत के प्रतिनिधि टीएस तिरुमूर्ति ने विख्यात ECOSOC आयोग में भारत के सीट जीतने की जानकारी दी है। उन्होंने कहा कि ECOSOC आयोग में भारत को स्थान मिलना गर्व की बात है। भारत को यह सदस्यता मिलने से बहुत लाभ होगा। इस आयोग में भारत को सदस्यता मिलने से भारत के द्वारा किए जा रहे लैंगिक समानता के प्रयासों को बढ़ावा देने में काफी मदद मिलेगी। भारत द्वारा किए जा रहे सभी प्रयासों में महिला सशक्तीकरण को भी बढ़ावा देने के लिए यह उपलब्धता एक महत्वपूर्ण समर्थन शाबित होगी। साथ ही टीएस मूर्ति ने अन्य सभी सदस्य देशों को भारत को समर्थन के लिए धन्यवाद भी किया।

सदस्यता के चुनाव के लिए किन देशों ने लिया था भाग

कमीशन ऑन स्टेटस ऑफ वूमेन आयोग में सदस्यता पाने कि लिए एशिया से चीन, अफगानिस्तान और भारत ने हिस्सा लिया था। भारत और अफगानिस्तान ने 54 सदस्यों के बीच सदस्यता के इस चुनाव में जीत हासिल की है। चीन को, भारत और अफगानिस्तान के सामने कुछ चंद वोट ही हासिल हुए। चीन सदस्यता के इस चुनाव में जीत के लिए आधे वोट भी जुटाने में असमर्थ रहा।

चीन को मिली भारत से करारी हार

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि चीन इस वर्ष बीजिंग वर्ल्ड कॉन्फ्रेंस ऑन वूमेन (1995) की पच्चीसवीं वर्षगांठ मना रहा है। इस मौके पर अफसोस चीन को भारत के हाथों करारी हार का सामना करना पड़ा है। भारत यूनाइटेड नेशन के कमीशन ऑन स्टेटस ऑफ वूमेन का चार सालों के लिए सदस्य रहेगा। चीन के लिए ECOSOC की सदस्यता ना पाना यकिनन किसी सदमें से कम नही है।

अंतर्राष्ट्रिय स्तर भारत की बेहतर छवि

भारत का यूनाइटेड नेशन के कमीशन ऑन स्टेटस ऑफ वूमेन का सदस्य बनना भारत की बेहतर छवि को दर्शाता है। चीन का जीत के लिए आधे वोट भी जुटा ना पाना चीन की अंतर्राष्ट्रिय स्तर पर खराब छवि का ही संकेत है। भारत और चीन के बीच चल रहे सीमा विवादों के मामलें में अब चीन को अपनी हार मान लेनी चाहिए। चीन जब कमीशन ऑन स्टेटस ऑफ वूमेन का सदस्य के चुनाव में आधे वोट भी जुटा नही पाया तो चीन को यह समझ जाना चाहिए की चीन के साथ अब कोई नहीं है जो उसके विस्तारवाद नीति का सर्थन करता हो।

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