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Parveen Sultana Birthday : जो रियाज़ करेगा वो राज करेगा|

Parveen Sultana Birthday : जो रियाज़ करेगा वो राज करेगा|

आपने यह गाना तो सुना ही होगा (हमे तुमसे प्यार कितना) क्या आप जानते है यह गाना  किसने गाया है जी हा बिलकुल सही यह गाना भारतीय सिंगर परवीन सुल्ताना जी ने गाया है |

Parveen Sultana

इस गीत को अपनी अन्तरात्मा मानने वाली गायिका परवीन सुल्ताना जी का जन्म 10 जुलाई 1950 में हुआ था | उनकी जन्म-भूमि असम और कर्म-भूमि मुम्बई रही है। इनका सम्बन्ध पटियाला घराने से है। असमिया पृष्ठभूमि से ताल्लुक रखने वाली परवीन सुल्ताना ने पटियाला घराने की गायकी में अपना अलग मुकाम बनाया है। उनके परिवार में कई पीढ़ियों से शास्त्रीय संगीत की परम्परा रही है|

उस्ताद दिलशाद खान साहब से गायकी के क्षेत्र में शिक्षा ले चुकी परवीन ने 1975 में दिलशाद खान साहब से शादी की। कई फिल्मों में गा चुकी परवीन इन दिनों अपने पति दिलशाद के साथ मिलकर सारे विश्व में कई कांसर्ट का हिस्सा बन चुकी है। यूं तोगायकी की शुरूआत संगीत सम्राज्ञी परवीन नें महज़ पांच वर्ष की उम्र से की |

मगर फिल्मों में गायकी की शुरूआत फिल्म“पाकिजा” से की। सोलह वर्ष की उम्र में परवीन मुंबई आईं और इत्तेफाक से नौशाद साहब ने परवीन की गायकी को एक शो में देख लिया था, उसी से प्रभावित होकर उन्होंने परवीन को एक खूबसूरत मौका फिल्म “पाकिजा” में दिया।

image source : sarthak school of music

दोस्तों परवीन सुल्ताना की सोच ने ही उन्हें सफल बनाया है | उनका मानना है की जिस दिन कोई खुद को परफेक्ट मान लेगा उसी दिन वो ख़त्म हो जायेगा | मात्र 12 साल की उमर में सन 1962 में परवीन ने कोल्कता में अपना पहला स्टेज परफॉरमेंस दिया था | उस परफॉरमेंस के बाद उन्होंने देश विदेश में बहुत सी बेहतरीन स्टेज परफॉरमेंस दी | आपको यह जानकर ख़ुशी होगी की वो भारत की पहेली महिला है जिनके बारे में न्यू योर टाइम्स ने स्टोरी कवर की |

परवीन का मानना ​​है कि भारतीय शास्त्रीय संगीत की सुंदरता इसके टाइम टेस्टेड वैल्यू में निहित है। वह मंच पर प्रशिक्षण और प्रस्तुति की पवित्रता को बनाए रखने पर जोर देती है। “यह एक गुरुमुखी विद्या है, जो गुरु के सामने बैठकर ग्रहण की जाती है, और करणी विद्या, जिसका अर्थ है अभ्यास करके प्रवीणता प्राप्त करना। जो रियाज करेगा वो राज करेगा।

Parveen Sultana –   परवीन सुल्ताना

परवीन सुल्ताना जी की एक बात तो मुझे  बहुत अच्छी लगी 100th  प्रतः स्वर संगीत कॉन्सर्ट  में परवीन कहती है “मैं असंगीतमय और कठोरता से दूर रहती हूँ। यदि मुझे किसी प्रकार की घृणा/नकारात्मकता का आभास होता है तो मैं पीछे हट जाती हूं और दूर चली जाती हूं। मेरा धर्म संगीत है। मैं नमाज अदा करता हूं, मंदिरों, चर्चों, गुरुद्वारों और मस्जिदों में जाती हूं। हर कॉन्सर्ट में दर्शक मुझ पर भवानी दयानी गाने पर जोर देते हैं। जब मैं तानपुरा के साथ बैठती हूं और संगीत के साथ एक हो जाता हूं तो मुझे उसमें अल्लाह और देवी सरस्वती दोनों मिलते हैं।

उन्होंने बॉलीवुड फिल्मों जैसे गदर, कुदरत, दो बूंद पानी, और पाकीज़ा, और कई अन्य फिल्मों के लिए भी गाया है।उन्होंने अपना आखरी गाना विक्रम भट्ट की फिल्म “1920”का थीम सोंग गाया था ।उन्होंने एचएम्वी, पोलीडोर, म्यूजिक इंडिया, भारत रिकार्ड्स , औविदिस, मेगनासाउंड, सोनोडिस्कक और अमीगो के लिए गाने रिकॉर्ड किये है।1976 में उन्हें पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। इसके अलावा परवीन सुल्ताना जी को 1972 में क्लियोपेट्रा ऑफ म्यूज़िक, 1980 में गंधर्व कला नीधि, 1986 में मियाँ तानसेन पुरस्कार तथा 1999 में संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार के साथ ही अनेकों पुरस्कार से नवाजा जा चुका है। परवीन सुल्ताना की आवाज़ आज भी सदाबहार बनी हुई है।

 

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रिपोर्टर – छाया चौहान

मीडिया दरबार

 

 

 

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