अंतर्राष्ट्रीय

SCO में रुस ने किया भारत का संमर्थन …|

SCO में रुस ने किया भारत का संमर्थन

दुनिया के गलियारे से भारत के लिए एक अच्छि खबर सामने आई है। रुस ने शंघाई सहयोग संगठन में कश्मीर मुद्दें को लेकर भारत का समर्थन करते हुए पाकिस्तान को फटकार लगाई है। इस फटकार के पीछे रुस की क्या है मंशा औऱ भारत को इससे कैसे होगा फायदा

शंघाई सहयोग संगठन क्या है?

रूस ने शंघाई सहयोग संगठन में भारत की बात का समर्थन करते हुए कहा है कि यहां चर्चा के दौरान कश्मीर जैसे भारत-पाकिस्तान के द्विपक्षीय मुद्दों को नहीं लाना चाहिए। रूस ने इसे संगठन के सिद्धांत के ख़िलाफ़ बताया है। रुस द्वार कही गई इस बात का सही अर्थ समझन के लिए हमें जानन होगा की एससीओं यानी शंघाई सहयोग संगठन क्या है, SCO एक स्थायी अंतर्राष्ट्रीय संगठन है। इसकी स्थापना 15 जून 2001 को चीन की आर्थिक राजधानी शंघाई में हुआ था। यह एक राजनीतिक, आर्थिक, और सुरक्षा संगठन है, जिसका उद्देश्य सदस्य देशों में शांति सुरक्षा व स्थिरता बनाए रखना है।

क्या है उद्देश्य

इस संगठन में एक चार्टर पर भी सदस्य देशों से हस्ताक्षर करवाऐं गए थे, जिसका उद्देश्य संगठन के लक्ष्यों व सिंध्दांतों आदि के साथ इसकी संरचना तथा गतिविधियों को रेखांकित करता है। इस संगठन की अधिकारिक भाषाऐं चीनी और रुसी है। और वर्तमान में इसके सदस्य देशों में कज़ाकिस्तान, चीन, किर्गिस्तान, रूस, ताजिकिस्तान, उज़्बेकिस्तान, भारत और पाकिस्तान शामिल  है। दरअसल हर बार एससीओ में पाकिस्तान द्वारा कश्मीर के मुद्दें को उठाकर पाकिस्तान अपना हित साधझने का प्रयास कर रहा था , अभी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को हुई संगठन के डिजिटल शिखर सम्मेलन में अपने संबोधन में समूह के आधारभूत सिद्धांतों का उल्लंघन कर द्विपक्षीय मुद्दों को अनावश्यक रूप से बार-बार लाने पर आपत्ति ज़ाहिर की थी।

sco में रुस द्वारा कश्मीर मुद्दें पर समर्थन करने के पीछे क्या है मंशा

इसी पर रूस मिशन के उप-प्रमुख रोमन बाबुश्किन ने एक प्रेस मीटिंग के दौरान कहा कि यह एससीओ चार्टर का हिस्सा है कि द्विपक्षीय मुद्दों को एससीओ के एजेंडे में नहीं लाया जाए। रुस के द्वार कश्मीर पर यह बयान देना भारत के लिए शुभ संकेत दे रहा है। पर साथ ही यह भी प्रश्न खड़ा करता है कि जिस रुस ने 1962 में भारत और चीन के बीच हुए युध्द में किसी एक कासमर्थन करने से कन्नी काट ली थी। वह अब भारत के इस आंतरिक द्दें पर इतना खुल कर कैसे समर्थन कर रहा है। जगज़ाहिर है कि पाकिस्तान द्वार किसी भी अंतर्राष्ट्रिय स्तर पर कश्मीर का मुद्दा उठाए जाने पर चीन ने हमेशा उसका पक्ष और भारत का विरोध किया है। और रुस हमेशा चीन को भाई और भारत को दोस्त मानता आया है, अब एससीओ में कश्मीर के मुद्दें को उठाए जाने पर पाकिस्तान का विरोध और भारत का समर्थन कुछ अटपटा तो ज़रुर लगता है और साथ ही और ऐसे रुस के चीन के साथ संबंध खराब होने के भी कयास लगाए जा रहें है। खैर जो भी हो रुस द्वारा दिए गए इस बयान से भारत के साथ रुस के अच्छे संबध होने की आशा की जा रही है। रुस और भारत के बीच संबंधो की बात की जाए तो, चीन और रूस के बीच द्विपक्षीय संबंधों का इतिहास बहुत ही पुराना है , हां वो बात अलग है की साल 2014 में रुस को अमेंरिका के साथ चल रहें विवाद के कारण चीन के साथ सहयोग बढ़ाने के लिए विवश हुआ। भारत और रूस दोनों ही देश एक दूसरे की रणनीतिक स्वायत्तता तथा स्वतंत्र विदेशी नीति के समर्थक रहे हैं।

भारत- रुस के बीच संबंधो क्या पड़ेगा असर

वर्तमान में रूस द्वारा देश की अर्थव्यवस्था में चीनी हस्तक्षेप को एक सुरक्षित स्तर तक सीमित रखा गया है। भारत की स्वतंत्रता के बाद से रक्षा, अंतरिक्ष, परमाणु ऊर्जा, औद्योगिक तकनीकी और कई अन्य महत्त्वपूर्ण क्षेत्रों में देश की स्थानीय क्षमता के विकास में रूस का महत्त्वपूर्ण योगदान रहा है। वैश्विक राजनीति और कई महत्त्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर अमेरिका के समक्ष रूस एक सकारात्मक संतुलन स्थापित करने में सहायता करता है। अब रुस द्वारा इस बयान से भारत और रुस के बीच संबंध और भी मजबूत होने की आशा है।

रुचि पाण्डें, मीडिया दरबार

शेयर करें
COVID-19 CASES