राजनीति

UP में निषाद वोटों की नाव क्या पार लगाऐगी 2022 का चुनाव?

क्या UP में अपने दम पर निषाद पार्टी लडेंगी चुनाव?

UP में आगामी चुनाव को लेकर राजनीतिक दल किस प्रकार से सक्रीय है इससे जुड़ी खबर तो हम आपको बताते ही रहते है, लेकिन आज बात होगी यूपी के एक महत्वपूर्ण समुदाय निषाद समुदाय की जिन्हें अक्सर यूपी का एक मजबूत वोट बैंक ही माना गया है।

लेकिन आने वाले UP विधानसभा चुनाव 2022 के लिए निषाद कैसे कर रहें है चुनावी तैयारी और कितनी है UP के चुनाव में इनकी पकड़ इस पर करेंगे हम आज चर्चा-

पिछले महिने बीजेपी सरकार की सहयोगी पार्टी निषाद पार्टी ने अपने दम पर यूपी में जिला पंचयात चुनाव लड़ने का एलान किया, निषाद पार्टी के अध्याक्ष ने तब ये कहते हुए भाजाप पर तंज कसा कि UP में भगवान राम की झाँकी निकाल सकते है तो निषाद राज की क्यों नहीं?

निषाद दल अध्यक्ष संजय कुमार निषाद ने कहा बीजेपी ने अगर जल्द ही आरक्षण लागू नहीं किया तो 2022 विधानसभा चुनाव में 164 सीटों पर उनकी पार्टी चुनाव लड़ेंगे।

भाजपा द्वारा निषाद वोटों को साधने की कोशिश

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वहीं अगर भाजपा की निषाद वोटो को साधने की कोशिश की ओर गौर करें तो, बीजेपी ने इस बार पिछले साल अगस्त में ही जय प्रकाश निषाद को राज्यसभा प्रत्याशी बनाकर मिशन 2022 का बिगुल फूक ही दिया था। जिससे ये तो सीधे सीधे साफ हो गया था कि यूपी में इस बार निषाद वोटों की नाव ही साल 2022 चुनाव को पार लगाऐगी।

अब अगर जय प्रकाश निषाद की चुनावी पकड़ की बात करें तो। उनकी निषाद वोटरों में अच्छी पैठ बताई जाती है। यूपी के गोरखपुर समेत 135 विधानसभा सीटों पर निषाद हार जीत के समीकरण को बदलने में विशेष भूमिका निभाते है। और केवल गोरखपुर में ही निषाद वोटरों की संख्या 6 लाख से अधिक है।

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इतना ही नहीं अगर देश के प्रधानमंत्री औऱ बीजेपी का सबसे बड़ा चुनावी चेहरा यानी नरेंद्र मोदी की बात करें तो उनके संसदीय सीट वाराणसी में भी निषाद वोटरों की संख्या अच्छी खासी है। वाराणसी से जुडे शिवपुरी विधानसभा क्षेत्र में भी निषाद वोटरों की संख्या अच्छी खासी है।

लोकसभा चुनाव के समय मिलाया था हाथ

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अब अगर भाजपा की निषाद वोटरों को साधने की कोशिश पर ध्यान दें तो लोकसभा चुनाव 2019 से पहले बीजेपी ने यूपी में निषाद पार्टी के साथ हाथ मिलाया था।

साथ ही बीजेपी ने निषाद पार्टी के अध्यक्ष डॉ. संजय निषाद के बेटे और पूर्व सपा सांसद प्रवीण निषाद को भाजपा में शामिल कर संतकबीरनगर सीट पर चुनाव लड़ने में मदद दे कर लोकसभा तक पहुँचाया था। जिससे निषाद वोटरों के बीच बीजेपी ने अपनी छवि बेहतर कर ली थी।

इसके बाद बीजेपी की ओर से बसपा पार्टी के पूर्व विधायक और भाजपा के क्षेत्रीय उपाध्यक्ष जय प्रकाश निषाद को प्रत्याशी बनाकर जातीय समीकरण भी साधा गया है। जिसके बाद से ही भाजपा के UP 2022 चुनाव से पहले इस जातीय समीकरण को दुरुस्त करने में अहम बताया जा रहा है।

निषाद मतदाताओं को कौन सी पार्टी अपनी ओर कर पाऐगी ?

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यूपी में निषाद बहुल क्षेत्र की बात करें तो गोरखपुर शहर पिपराइच, कैंपियरगंज, सहजनवां औऱ बांसगांव में 5 लाख से अधिक निषाद रहते है। वहीं खजनी और चिल्लूपार विधानसभा क्षेत्र में एक लाख से ज्यादा निषाद रहते है।

इसके अलावा मिर्जापुर, महराजगंज, कुशीरनगर, बलिया, संतकबीरनगर, भदोही, चंदौली की विधानसभा सीटों पर निषाद वोटरों का बहुत प्रभाव है और जौनपुर की मल्हनी विधानसभा सीट तो निषाद बाहुल्य ही है।

यानी यूपी के कई क्षेत्रों में निषाद समुदाय अपनी अलग अलग तरह से पकड़ रखता है, इसलिए अलग अलग दल अपने अपने तरीके से निषाद वोटरों को रिझाने की कोशिश कर रहें है|

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अब यहां बात चाहें बीजेपी की हो, सपा की हो, या फिर बसपा की सभी दल निषाद वोटरों को अपनी ओर करने में की दिशा में लगातार जुटे है, लेकिन साल 2022 के UP चुनाव में अभी वक्त है तब तक निषाद वोटरों का कैसे रुख बदलता है तो आने वाले समय में साफ हो पाऐगा।

रिपोर्ट- रुचि पाण्डें

मीडिया दरबार

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